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मंडल के 142 गो आश्रय स्थलों में अनियमितता, जांच के आदेश

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गोंडा के आयुक्त सभागार में गो आश्रय केंद्रों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते आयुक्त देवीपा? - फोटो : GONDA
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गोंडा। मंडल में बने गो आश्रय स्थलों में खर्च में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। आयुक्त महेंद्र कुमार की समीक्षा बैठक में शुक्रवार को इसका खुलासा हुआ। उन्होंने आयुक्त सभागार में मंडल के सभी जनपदों में संचालित और निर्माणाधीन गो आश्रय स्थलों, कान्हा गोशालाओं और गौ संरक्षण केंद्रों की जिलेवार समीक्षा की। इस दौरान कई जगहों पर निर्माण और गौ वंशों के भरण-पोषण पर होने वाले व्यय में बड़ी अनियमितता सामने आई है। जिस पर आयुक्त ने जांच के आदेश दिये हैं। गोंडा में गो संरक्षण की प्रगति संतोषजनक न होने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का वेतन रोका गया है।
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आयुक्त महेन्द्र कुमार ने गो आश्रय स्थलों में गौ वंशों के संरक्षण पर होने वाले व्यय की जांच के लिए उपनिदेशक पशुपालन को जिम्मेदारी दी है। आयुक्त ने लक्ष्य के सापेक्ष गो वंशों की सुपुर्दगी कराकर रिपोर्ट देने के निर्देश सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को दिये हैं। श्रावस्ती इकौना के गौतम वार्ड में 81 लाख रुपये की लागत से बनी गोशाला में मात्र 13 गोवंशों को संरक्षित किये जाने पर आयुक्त ने जांच की आदेश दिये हैं। वहीं बलरामपुर के सीडीओ बलरामपुर व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
गड्ढों में बना दिया गो आश्रय केंद्र
बलरामपुर में कई जगहों पर गो आश्रय स्थलों के निर्माण कार्य में ढिलाई की शिकायत मिली है। वहीं यहां चार जगहों पर नीची जगहों पर गौ संरक्षण केंद्र बना देने के कारण जलभराव की समस्या बनी रहती है। इस लापरवाही पर आयुक्त ने बलरामपुर के मुख्य विकास अधिकारी से जवाब मांगा है।
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मंडल में कुल 13677 गोवंशों का संरक्षण किया गया
उपनिदेश पशुपालन ने बताया कि मंडल के सभी जिलों में कुल 13677 गोवंशों का संरक्षण किया गया है। गौ आश्रय केंद्रों पर 11563, कान्हा गौशालाओं में 180 गोवंश, कांजी हाउस में 789 गोवंशों और बृहद गौ संरक्षण केन्द्रों पर 1145 गोवंशों का संरक्षण किया गया है। तुलसीपुर में भूमि के अभाव में बृहद गो संरक्षण का निर्माण अधूरा है। शासन की ओर से इस परियोजना के लिए 65 लाख रुपये का बजट स्वीकृत है। इसके लिए आयुक्त ने डीएम बलरामपुर को निर्देश दिये गये हैं।
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