गोंडा। पंडरीकृपाल ब्लॉक में मनरेगा योजना से वित्तीय वर्ष 2017-18 व 2018-19 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में घपले के मामलों में अब जाकर कार्रवाई शुरू हुई है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा के कड़े रुख के बाद नगर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके मामले की जांच शुरू की है।
योजना में टिकरिया पंचायत के गोआश्रय केंद्र में तालाब निर्माण कराए बिना ही बजट निकाल लिया गया था। गोआश्रय केंद्र के साथ ही खजुहा तालाब के जीर्णोद्धार समेत कई परियोजनाएं दोनों वित्तीय वर्ष में तैयार की गईं। तत्कालीन बीडीओ हरिश्चंद्र प्रजापति ने योजनाओं काे स्वीकृति दी और बिना कार्य कराए बजट निकालने के खेल में अन्य कर्मियों के साथ शामिल रहे। मामले में करीब 31 लाख रुपये का गबन हुआ है। मनरेगा घोटाले में तत्कालीन बीडीओ जो वर्तमान में सीतापुर में जिला विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं, उनके साथ ही चार अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत किए गए कार्याें की आड़ में फर्जी भुगतान किया। कोई वास्तविक काम नहीं किया गया, केवल कागजों पर काम दिखाकर भुगतान कर दिया गया।
जांच में अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग अंगद सिंह कुशवाहा, अवर अभियंता लघु सिंचाई रमेश कुमार, लेखाकार संजीव वर्मा और कृष्ण कुमार मिश्र की भूमिका उजागर हुई। जिलाधिकारी के आदेश पर ब्लॉक के वरिष्ठ सहायक बृजेश द्विवेदी ने घोटाले की एफआईआर नगर कोतवाली में दर्ज कराई है। नगर कोतवाल संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि मामले की जांच उपनिरीक्षक राकेश कुमार को सौंपी है। घपले से जुड़े अभिलेखों के आधार पर जिम्मेदारी तय की होगी।