परसपुर के पीएचसी त्योरासी में खाली डॉक्टर की कुर्सी। -संवाद
गोंडा। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल जन आरोग्य मेले की कमान अप्रशिक्षित हाथों में सौंपकर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां डॉक्टर हाजिरी लगाकर घर चले जाते हैं, वार्ड बॉय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवाएं बांटकर मेले की खानापूर्ति कर रहे हैं। रविवार को 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जन आरोग्य मेले में उपचार का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत दावे से इतर निकली।
पीएचसी त्योरासी में दोपहर 12:55 बजे डॉक्टर की कुर्सी खाली थी, लेकिन ओपीडी रजिस्टर में 43 मरीजों का पंजीकरण दर्शाया गया था। चपरासी राकेश मरीजों का पंजीकरण कर रहा था, वहीं वार्ड बॉय धमेंद्र शुक्ल व प्रयोगशाला सहायक प्रदीप कुमार सिंह की ओर से उपचार करने की बात मरीजों ने बताई। कर्मियों ने बताया कि डॉ. निशा दूबे सुबह आई थीं। हस्ताक्षर बनाकर कुछ मरीजों का उपचार किया, फिर उनकी तबीयत खराब हो गई और वह घर चली गईं। वहीं, फार्मासिस्ट आलम शेर खान ने छुट्टी ले रखी थी। डोमाकल्पी से आए दिव्यांग संदीप कुमार, अंदूपुर से आए भगवानदीन, उतरौला निवासी मो. अनस व चकसिया निवासी सुरेंद्र ने बताया कि यहीं लोग उपचार कर रहे हैं, डॉक्टर नहीं हैं। परसपुर सीएचसी अधीक्षक लवकेश शुक्ल ने बताया कि डॉ. निशा दूबे ने बीमारी की सूचना दी है। अप्रशिक्षित लोगों के उपचार की शिकायत पर जांच कराई जाएगी।
पीएचसी विद्यानगर में दोपहर 12:47 बजे फार्मासिस्ट हेमंत कुमार उपचार करते मिले। 23 मरीजों का इलाज किया जा चुका था। फार्मासिस्ट ने बताया कि डॉ. आदित्य गौड़ व आयुष चिकित्सक डॉ. आलोक गुप्ता का स्थानांतरण हो गया है। वार्ड बॉय, एलटी, चपरासी व एएनएम की तैनाती भी नहीं है, इसलिए खुद उपचार करना पड़ रहा है।
पूरे तिवारी पीएचसी में सुबह 11:25 बजे तक आयुष चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार ने 16 मरीजों का इलाज किया। यहां जांच के लिए प्रयोगशाला सहायक न होने के कारण जांच नहीं हो रही है, सिर्फ ब्लड प्रेशर मापा गया। विसेन पुरवा निवासी फुलवारी सिंह उच्च रक्त चाप का इलाज कराने आए थे, उनका इलाज किया गया।