गोंडा। एक निजी अस्पताल में महिला की मौत के बाद शिकायत की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। निजी अस्पताल संचालकों व डॉक्टरों की लापरवाही की जांच बयान व साक्ष्य जुटाने में उलझकर रह जाती है। एक महीने के भीतर सीएमओ कार्यालय में चार बड़ी शिकायतें हुईं, लेकिन किसी भी शिकायत में कोई नतीजा सामने नहीं आया।
25 मई को केशवपुर पहड़वा के महादेवा निवासी तारा देवी की एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों ने एक निजी अस्पताल संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएमओ कार्यालय में शिकायत की। मामला डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सामने भी उठाया गया। अभी तक जांच का कोई नतीजा नहीं निकल सका।
चार जुलाई को भुलभुलिया निवासी सरिता देवी की ओर से शिकायत की गई कि उसके परिजन ममता देवी के सिजेरियन प्रसव में लापरवाही की गई। इससे नवजात के पैर की हड्डी टूट गई। 13 जुलाई को मुन्नन खां चौराहे के पास एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। लेकिन, दो दिन के भीतर ही दोनों बच्चों की मौत हो गई। एक मामले में तो डीएम नेहा शर्मा से भी शिकायत की गई।
शिकायतों की अधिकता के कारण लग रहा समय
-बीते दिनों कई शिकायतें आ गई हैं। प्रत्येक शिकायत की जांच करने के लिए आरोपी, शिकायतकर्ता व गवाह का बयान दर्ज कराना तथा जरूरी साक्ष्य जुटाने में समय लग जाता है। शिकायतों की जांच निष्पक्ष की जाएगी।
डॉ. आदित्य वर्मा, एसीएमओ