गोंडा। जिले के 35 लाख आबादी की सेहत की देखरेख की जिम्मेदारी उठाने वाला जिला अस्पताल रात में खुद वेंटिलेटर पर आ जाता है। अस्पताल में भर्ती मरीज दर्द से तड़पते रहे और तीमार जागते रहे, जबकि मरीजों का इलाज करने वाले जिम्मेदार रात में अपने रूम का दरवाजा बंद करके सोते रहे। कई मरीजों की तो हालत काफी खराब रही, लेकिन स्वाथ्य कर्मियों की रात में उनके नींद के साथ उनकी संवेदनाएं भी सो गईं। जिला मुख्यालय के बाबू ईश्वर शरण सिंह जिला चिकित्सालय मेडिकल कॉलेज बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन रात में मरीजों के इलाज व इनके इमरजेंसी सेवाएं बेहद खराब है। गुरुवार को अमर उजाला ने जिला अस्पताल के स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जाना, यहां रात में इमरजेंसी कक्ष को छोड़कर अन्य वार्डों में स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनाएं भी सोती मिलीं। पेश है इस्लाम खां की रिपोर्ट-
रात होते ही सो जाता है इलाज करने वाला स्टाफ
जिला अस्पताल में रात होते ही मरीजों के इलाज करने की ड्यूटी निभाने वाले कर्मियों को आराम व सोने की तलब होने लगती है। अमर उजाला की पड़ताल में अस्पताल का आधे से अधिक स्टाफ सोता नजर आया। महिलाओं के इलाज के लिए अलग-अलग तीन वार्ड बनाये गये हैं। इसके लिए रात में दो स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वाय की ड्यूटी लगाई जाती है। यहां पर महिलाओं के लिए दो सर्जिकल वार्ड है, जबकि एक हड्डी वार्ड है। यहां पर करीब 200 मरीज भर्ती हैं। रात में स्टाफ नर्स जाग कर ड्यूटी करने के बजाए स्टाफ रूम का अन्दर से दरवाजा लॉक कर सोते मिले। जबकि वार्ड में कई महिलाएं दर्द से तड़प रही थीं। इसी तरह से चिल्ड्रेन वार्ड में करीब 15 बच्चे भर्ती है जिसमें से दो की हालत काफी नाजुक है। एक बच्चे को आक्सीजन लगा था। लेकिन इसको देखने के लिए काफी देर तक कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं आया। स्टाफ नर्स रूम में लाइट बंद कर कर्मचारी सोते मिले। अपने लाडलों को बीमारी से जूझते देख उनके परिजनों के आंखों से नींद गायब थी, जबकि कर्मचारी मस्ती में सोते रहे। इसी स्टाफ को हड्डी वार्ड को भीे देखने की जिम्मेदारी है। इसी तरह से इमरजेन्सी वार्ड की निगरानी के लिए स्टाफ रूम में रात को घुप अंधेरा रहा। दरवाजा खुला था लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी सोते रहे। जबकि इमरजेन्सी वार्ड के मरीज रात में दर्द से तड़पते रहे। अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के स्टाफ रूम का नजारा अलग ही था। पांच कर्मियों का स्टाफ अपने अपने मोबाइल में व्यस्त नजर आया।
बच्चे की चलती रही पसली पर भर्ती को नहीं पसीजे डॉक्टर
बच्चे की पसली चलती रही उसे सांस भी लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन डॉक्टर उसे भर्ती करने के लिए नहीं पसीजे। रूपईडीह ब्लाक के ग्राम खैरमपुर बनगाई निवासी विजय कुमार अपने भतीजे को पसली चलने व सांस लेने में दिक्कत होने पर उसका इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे। उनका कहना है कि डाक्टर ने भर्ती नही किया। कहा कि सुई लगा दी है कुछ देर में आराम हो जाएगा। आराम न होता देख वे लोग बाहर बैठ गये। धीेरे-धीरे काफी रात हो गई। विजय ने बताया कि बच्चे की अभी भी वैसे ही पसली चल रही है। डाक्टर ने बाहर से 210 रुपये की दवा मंगवाई थी दवा दिया है लेकिन आराम नहीं है। उनका कहना था कि घर दूर है अब सुबह होने का इंतजार कर रहा हूं सुबह कहीं प्राईवेट अस्पताल में दिखाएंगे। बाहर रात में हवा चलने से बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी लेकिन किसी भी डाक्टर ने उसे भर्ती नहीं किया।
छह हजार न देने से जिन्दगी की जंग लड़ रही मासूम
गोंडा। चिल्ड्रेन वार्ड में दो मासूम अपने जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उनका कसूर यह है कि उनके मां बाप के पास महिला अस्पताल में देने के लिए छह से आठ हजार रुपये नहीं थे। जुड़वा बच्चों में एक मासूम बच्ची को आक्सीजन लगा था जो अपने जिन्दगी के लिए हालात से जंग लड़ रही है। इटियाथोक ब्लाक के ग्राम अर्जुनपुर निवासी विश्व नाथ ने बताया कि उनकी पत्नी को कुछ दिन पहले ब्लॉक अस्पताल में दो जुड़वा बच्चे पैदा हुए थे। जुड़वा होने के नाते दोनों काफी कमजोर हैं। उन्हें लेकर जब वह जिला महिला चिकित्सालय पहुंचा तो वहां डाक्टर व कर्मचारियों ने उसके बेटे को आईसीयू में 12 घण्टे तक रखने का छह हजार रुपये वसूल किये। दूसरा बच्चा जो लड़की है उसको भी आईसीयू में रखा जाना जरूरी था, लेकिन उसके पास पैसे नहीं बचे थे जिससे वह मजबूर हो गया। इसके बाद चिकित्सक ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। चिल्ड्रेन वार्ड में मासूम को आक्सीजन लगाया गया है,जबकि उसे वेन्टिलेटर पर रखकर इलाज व निगरानी की जरूरत थी। मासूम अपनी जिंदगी के लिए लड़ रही है। उसे जिला अस्पताल में आईसीयू शुरू न होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
24 घण्टे इमरजेन्सी सेवा का दावा पर नहीं होती कोई जांच
गोंडा। जिला अस्पताल में 24 घण्टे इमरजेन्सी सेवा का दावा हवा हवाई है। रात में आने वाले मरीजों के जांच करने की कोई सुविधा नहीं है। रात में आने वाले मरीज के खून, पेशाब की जांच के अलावा उनका एक्स-रे, अल्ट्रासाउण्ड व सिटी स्कैन किये जाने का व्यवस्था नहीं है। इन जांचों के लिए जिला अस्पताल में सारे संयन्त्र लगे हैं, लेकिन रात में इसे आपरेट करने के लिए कोई उपलब्ध नहीं रहता। रात में क्षेत्रीय निदान केंद्र भवन में ताला लग जाता है। जबकि दुर्घटना व मारपीट के मामले में उक्त जांचों का सबसे पहले होना इलाज के लिए जरूरी है।
नहीं दिखे सुरक्षा कर्मी
गोंडा। जिला अस्पताल से आये दिन बाइक व मोबाइल आदि के चोरी होने की घटनाएं हो रही हैं। जिला अस्पताल परिसर की सुरक्षा के लिए सिर्फ चौकीदार रखे गये हैं। सुरक्षा कर्मियों के न होने से किसी घटना होने पर मरीजों व उनके सामान की सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। 11.30 बजे से लेकर 2.00 बजे तक अस्पताल को देखने कोई पुलिस कर्मी भी नहीं पहुंचा।
अस्पताल के सभी कर्मियों को मरीजों के इलाज में संवेदशील रहने का निर्देश दिया गया है। रात में औचक निरीक्षण कर ड्यूटी में लापरवाही करने वाले चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल की व्यवस्था को ठीक किया जाएगा। -डॉ. अरूण लाल, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल गोंडा।