जब तक आरटीआई के आवेदनकर्ताओं को सारी जानकारियां नहीं मिल जातीं, तब तक कोई भी पत्रावली बंद नहीं होगी। इसलिए अधिकारी आरटीआई में मांगी गईं सूचनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदक को हर हाल में दिलवाना सुनिश्चित करें। जिस भी विभाग के विभागाध्यक्ष ऐसा नहीं करेंगे, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। मंडल के ऐसे 191 अधिकारियों के खिलाफ राज्य सूचना आयोग से कार्रवाई की गई है।
प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त स्वदेश कुमार ने शुक्रवार को यह बातें आयुक्त सभागार में जनसूचना अधिकार अधिनियम नियमावली के संबंध में प्रथम अपीलीय एवं जनसूचना अधिकारियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन कहीं।
इस मौके पर जनपद बलरामपुर व श्रावस्ती के प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों व जनसूचना अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि देवीपाटन मंडल में जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत कुल 993 प्रकरण राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन हैं, जिनमें जनपद गोंडा के 444, बलरामपुर के 170, बहराइच के 296 व श्रावस्ती के 83 प्रकरण शामिल हैं।
जिसमें आवेदकों को समय से सूचना मुहैया न कराने वाले मंडल के कुल 191 अधिकारियों को राज्य सूचना आयोग दंडित भी कर चुका है। इसमें जनपद गोंडा के 63, बहराइच के 73, बलरामपुर के 47 व जनपद श्रावस्ती के आठ अधिकारी शामिल हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब सभी प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों एवं जनसूचना अधिकारियों को हर हाल में आवेदकों को सूचना देनी ही होगी। आरटीआई के तहत आवेदकों को एक्ट के दायरे में आनी वाली सभी सूचनाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है और अब आनाकानी कतई नहीं चलेगी। इस मौके पर मंडलायुक्त सुधीर दीक्षित, डीएम श्रावस्ती नीतीश कुमार आदि मौजूद रहे।