नेपाल के नए संविधान में मधेशियों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर दोनों देशों के बीच सदियों से चले आ रहे रोटी-बेटी के संबंधों पर भी दिखने लगा है। अपनी बेटियों के भविष्य के प्रति सजग भारतीय अब नेपाल में रिश्ता करने से कतराने लगे हैं।
बीते वर्ष करीब 137 भारतीय परिवारों ने अपनी बेटी व बेटों का रिश्ता नेपाल में किया था। इस साल अब तक मात्र 87 लोगों ने ही नेपाल में रिश्ता तय किया है। यही नहीं रिश्तों में आ रही कमी के बारे में स्थानीय लोगों ने यही बताया कि मधेश लोगों को नेपाली संविधान में वरीयता न दिये जाने से वह मधेशियों के भविष्य को लेकर सशंकित हैं।
भारत-नेपाल का मैत्री संबंध सदियों पुराना है। दोनों देशों में आने-जाने वालों पर किसी तरह का प्रतिबंध भी नहीं है। दोनों देशों के लोगों के बीच रोटी-बेटी का संबंध भी बहुत पुराना है। कई नेपाली बेटियां भारतीय बहू हैं तथा तमाम भारतीय बेटियां नेपाली घरों की शोभा बढ़ा रही हैं।
हर साल सैकड़ों परिवारों के लोग दोनों देशों में रिश्ता करते चले आ रहे है। गत वर्ष नेपाल में नया संविधान लागू होने के बद वहां के मधेशी समाज के लोगों को दोयम दर्जे का नागरिक करार दे दिया गया है। इसी बात को लेकर नेपाल में आज भी मधेशी अपना हक पाने के लिए संघर्षरत है।
भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में ही मधेश समाज के लोगों की आबादी सबसे ज्यादा है। भारत से सटे नेपाली इलाकों में मधेशियों का वर्चस्व सबसे अधिक है तथा इसी समाज के लोगों की भारतीय लोगों से रिश्तेदारी भी है। नेपाल संविधान में मधेशियों की उपेक्षा के कारण इसी क्षेत्र के लोगों का भविष्य सबसे अधिक असुरक्षित हो गया है।
नेपाल में रिश्ता करने वाले परिवार रिश्ते से पूर्व जिला प्रशासन को अर्जी देते हैं। नेपाल से आने वाली बेटियां जहां भारतीय बहू बनने की अर्जी देती हैं वहीं भारत से नेपाल जाने वाली बेटियां देश छोड़ने की अर्जी देती हैं। वर्ष 2015 में जनवरी से लेकर अप्रैल तक कुल 137 भारतीय परिवारों ने जिला प्रशासन को रिश्ते की अर्जी दी थी। वर्ष 2016 में यह संख्या घटकर 83 हो गई है।
स्थानीय निवासी सज्जनराम, शब्बू खां, राजकुमारी व अफसरी निशा आदि ने बताया कि नेपाल में मधेशी समाज के लोगों की हो रही उपेक्षा से अब वहां रिश्ता करना हमारे बच्चों के भविष्य के लिए ठीक नहीं होगा। आने वाले दिनों में मधेशी परिवारों की दिक्कत यदि बढ़ गई तो हमारे बच्चों को भी परेशानी होगी। ऐसी दशा में हम अपने बच्चों का नेपाल में रिश्ता करने से पूर्व कई बार सोचेंगे।