गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना पूूरी हो गई है। 1196 प्रधानों के साथ ही 1614 बीडीसी, 8 हजार के करीब पंचायत सदस्यों और 65 जिला पंचायत सदस्यों के निर्वाचन की घोषणा मंगलवार को हो गई। अब रिक्त पदों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है, बताया जा रहा है कि छह हजार से अधिक पंचायत सदस्यों और एक प्रधान के पद अभी रिक्त हैं।
इसकी रिपोर्ट निर्वाचन विभाग तैयार कर रहा है। वहीं जिला पंचायत सदस्यों के निर्वाचन की घोषणा से दलों का दम फूल रहा है। किसी के पास अध्यक्ष जिला पंचायत पद को जीतने के लिए बहुमत नहीं है। ऐसे में निर्दलीय सदस्यों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
जिला पंचायत सदस्यों के 65 पदों पर घोषित हुए प्रत्याशियों में उत्साह है और वह प्रमाण पत्र पाने के बाद मतदाताओं का आभार जताने में जुटे हैं। इसके साथ ही सभी की निगाहें अध्यक्ष पद के दावेदार पर टिकी है।
उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण अध्यक्ष पद का ही चुनाव है। इसके लिए दलों से जीते प्रत्याशियों के साथ ही निर्दलीय भी निगाहें टिकाए हैं कि कौन अध्यक्ष पद पर लडे़गा। अनारक्षित पद होने से बड़ों के मैदान में आने की उम्मीद है।
सदस्यों के निर्वाचन में भाजपा ने पार्टी के 18 सदस्यों के जीत का दावा किया है, वहीं सपा ने 20 का दावा किया है। जिसमें दो सदस्यों को स्वतंत्र माना है, यहां से सपा ने कई प्रत्याशियों को समर्थन दे रखा था। वहीं एक सीट पर प्रत्याशी दूसरे घोषित थे, लेकिन जीतने वाले को पार्टी का माना है।
वहीं पार्टी की ओर से सात अप्रैल को जारी सूची और 8 अप्रैल को संशोधन को देखा जाए तो 13 प्रत्याशी ही जीते हैं। 20 भी मान लें तो बहुत के लिए 33 सदस्य चाहिए होगा। अब निर्दलीयों को मिलाने की रणनीति दलों ने शुरू कर दी है। भाजपा के पंचायत चुनाव के संयोजक राकेश तिवारी का कहना है कि पार्टी के फैसले पर आगे की रणनीति तैयार होगी।
इसी तरह सपा के जिलाध्यक्ष आनंद स्वरूप उर्फ पप्पू यादव भी पार्टी नेताओं के साथ वार्ता करके निर्णय लेने की बात कही है। वहीं बसपा के जिलाध्यक्ष मनोज कनौजिया ने बताया कि पार्टी से तीन सदस्य चुने गए हैं। पार्टी ने ज्यादा प्रत्याशी भी नहीं उतारे थे।