कटरा बाजार के कटका में गेहूं दिखाते ग्रामीण व इस तरह का बांटा जा रहा गेहूं। स्रोत: उपभोक्ता
माधोपुर/धानेपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अगस्त में वितरित किए जा रहे गेहूं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। कई गांवों में लाभार्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कहीं काला तो कहीं बालू, मिट्टी व अन्य अशुद्धियों से युक्त गेहूं मिला है। खराब गुणवत्ता के कारण कई उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताई। शिकायतें मिलने के बाद डिप्टी आरएमओ ने गुणवत्ता की जांच के लिए तीन टीमें गठित कर कोटेदारों की दुकानों से गेहूं के नमूने लेने के निर्देश दिए हैं।
खराब गुणवत्ता के साथ सर्वर की भी समस्या
कटरा बाजार विकासखंड के कटका गांव में राशन वितरण के दौरान लाभार्थियों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोटेदार रामबिहारी ने बताया कि इस बार मिला गेहूं पहले की तुलना में अधिक गंदा है। कई कार्डधारक गेहूं लेने में हिचक रहे हैं। दूसरी ओर सर्वर की समस्या के कारण पूरे दिन में करीब 50 लाभार्थियों का ही सत्यापन हो पाता है। लाभार्थी नागा प्रसाद यादव ने बताया कि मिला गेहूं गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है।
बालू-मिट्टी युक्त गेहूं मिलने की शिकायत
धानेपुर क्षेत्र के उपभोक्ता सुरेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस बार मिला गेहूं काफी गंदा था। उसमें मिट्टी व अन्य अशुद्धियां भी दिखाई दीं। कोटेदार राजेश पांडेय ने भी माना कि इस बार गेहूं की गुणवत्ता ठीक नहीं रही, हालांकि कार्डधारकों ने मजबूरी में राशन ले लिया। कोटेदार लक्ष्मी देवी की दुकान पर वितरण करने वाले भोला जायसवाल ने बताया कि गेहूं का रंग बदला हुआ था। वहीं, कोटेदार फहीमुद्दीन की दुकान पर वितरण करने वाले रेहान ने भी गेहूं की गुणवत्ता खराब होने की बात कही।
जांच के लिए बनाई गईं तीन टीमें
गेहूं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली हैं। इसकी जांच के लिए एफसीआई, विपणन विभाग और आपूर्ति विभाग की तीन टीमें गठित की गई हैं। टीमें कोटेदारों की दुकानों से गेहूं के नमूने लेकर गुणवत्ता की जांच करेंगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एनके पाठक, डिप्टी आरएमओ
कटरा बाजार के कटका में गेहूं दिखाते ग्रामीण व इस तरह का बांटा जा रहा गेहूं। स्रोत: उपभोक्ता