खरगूपुर नगर पंचायत से चार किलोमीटर दूर खरगूपुर-आर्यनगर मार्ग पर अमडोहवा गांव में औद्योगिक आस्थान के लिए जिस भूमि का आवंटन किया गया था, आज तक वहां कोई उद्योग तो नहीं लगा, लेकिन कुछ लोगों ने उस जमीन पर अपने घर बना लिए, वहीं एक व्यक्ति ने स्कूल बना लिया।
बाकी भूमि पर जंगली घास उगी है व जलभराव है। जो एक-दो उद्योग लगे भी, वे चल नहीं पाए। वर्ष 1990 में 48 प्लाटों का आवंटन होना था, लेकिन 35 लोगों को उद्योग लगाने के लिए भूमि दी गई। शेष 13 लोगों को भूमि का आवंटन ही नहीं हो पाया।
13 में पांच अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को आवंटन किया जाना था, जो आज तक खोजे नहीं मिले। रही बात औद्योगिक आस्थान के स्थल विकास की तो यहां कोई झांकने तक नहीं आया। लिहाजा यह आस्थान अब जलमग्न एरिया व बंजर पड़ा है।
आस्थान पर बलरामपुर निवासी कृष्णस्वरूप को भूमि का आवंटन हुआ। उन्होंने बैंक से लाखों रुपये का ऋण स्वीकृत कराया। स्टील फैक्ट्री का निर्माण शुरू हुआ, जिसके तहत कुछ कमरे, कार्यालय के साथ ही विद्युत लाइन खींच कर ट्रांसफार्मर लगा दिया गया।
यह कार्य अभी चल ही रहा था कि अर्द्धनिर्मित स्टील फैक्ट्री से सटी भूमि के बगल से बहराइच-मनकापुर सरयू नहर का निर्माण कार्य शुरू हो गया। नहर खोदाई के चलते फैक्ट्री का निर्माण कार्य अधर में लटक गया। स्टील कारखाना के मालिक व सिंचाई विभाग के बीच भूमि को लेकर मुकदमा चलने लगा।
कई वर्षों तक मामले का निस्तारण न होने के कारण फैक्ट्री स्वामी ने इस कार्य से अपने हाथ खींच लिए। लगभग तीन वर्ष पूर्व फैक्ट्री के लिए चयनित करीब 2 एकड़ पड़ी जमीन को उद्योग विभाग गोंडा ने अमडोहवा गांव के ही महराजदीन, राजिंद्र प्रसाद, कुंवर बहादुर, शांति तिवारी, रामकली, राममिलन सहित अन्य ग्रामीणों को 11 वर्ष के लिए प्लाट के रूप में 1500 रुपये मासिक किस्त पर अनुबंधित कर दिया।
इनमें से कुछ लोगों ने जहां आवास बना लिए तो कुछ लोगों ने मिनी राइस मिल लगा लिया और कुछ ने निजी विद्यालय चलाना शुरू कर दिया है।
अमडोहवा गांव निवासी रामकली को भी भूमि का आवंटन हुआ था। मुकदमे का निस्तारण होने के बाद करीब ढाई साल पहले रामकली ने यहां राइस मिल का निर्माण कराया। राइस मिल तो लग गई, लेकिन इसका संचालन आज तक नहीं हुआ। राम कली ने बताया कि यहां बिजली नहीं है। औद्योगिक आस्थान पर किसी तरह की नाली, खड़ंजा या कोई बाउंड्रीवाल नहीं है।
जिस जमीन पर उद्यम लगाने की जगह लोगों के लिए तय की गई, उस स्थान पर अमडोहवा के ही एक व्यक्ति ने स्कूल खोल दिया। जमीन लेकर गांव के पप्पू तिवारी ने स्कूल संचालित कर दिया। इस आस्थान पर कोई उद्योग तो नहीं पनपा, लेकिन स्कूल चल रहा है।
मिनी औद्योगिक आस्थान खरगूपुर के स्थल विकास के लिए शासन को डिमांड भेजी गई है। नहर का मामला चल रहा था, इसलिए उक्त भूमि पर कोई ढंग का उद्योग नहीं लग सका। अब मामला खत्म हो गया है और दूसरे लोगों को भूमि का आवंटन कर दिया गया है। स्थल का विकास शीघ्र ही कराया जाएगा। -राजेंद्र कुमार, अपर सांख्यकी अधिकारी, औद्योगिक आस्थान