वर्ष 1995 से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण का रोस्टर चला आ रहा है। इस रोस्टर प्रणाली में आरक्षण का दोहन भी किया गया और दरकिनार भी, लेकिन इसका जादू जिले की 127 ग्राम पंचायतों पर नहीं चला। ये विशेष ग्राम पंचायतें क्यों नहीं आरक्षित हुईं, इन पर किसकी मेहरबानी रही, ये सवाल अब वहां के गांववासियों को ही नहीं अधिकारियों को भी सता रहे हैं।
पंचायतों के आरक्षण का रोस्टर चार बार लागू हो चुका है। पांचवीं बार पुराने रोस्टर पर ही आरक्षण तय हो रहे हैं। तो एक बार फिर यह सवाल उठना लाजमी है कि इस बार आरक्षण से वंचित 127 ग्राम पंचायतें आरक्षित हाेंगी या नहीं। वैसे बीते चुनावों में जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में 924 ग्राम पंचायतें आरक्षित हो चुकी हैं।
पंचायती राज अधिनियम लागू होने के बाद से आरक्षण प्रणाली के अनुसार ग्राम पंचायतों का आरक्षण पहले अनुसूचित जनजाति महिला/पुरुष होगा। यदि इनकी जनसंख्या नहीं है तो अनुसूचित जाति महिला/पुरुष, फिर पिछड़ी महिला/पुरुष, इसके बाद सामान्य महिला का आरक्षण चक्र के अनुसार चलेगा।
गोंडा जिले में 1054 ग्राम पंचायतों में चक्रानुक्रम व्यवस्था के तहत वर्ष 1995 में 231 ग्राम पंचायतें अनुसूचित जाति में आरक्षित हुईं। इसके बाद 2000 में 231 ग्राम पंचायतें, 2005 व 2010 में 231-231 ग्राम पंचायतें आरक्षित हो चुकी हैं। ऐसे में केवल 130 ग्राम पंचायतें ही शेष हैं, जो अनुसूचित जाति में आरक्षित होने को बची हैं।
यदि आरक्षण के प्रतिशत को लिया जाएगा तो फिर 231 ग्राम पंचायतें आरक्षित हो जाएंगी। लेकिन इससे ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ जाएगी। हालांकि आरक्षण रोस्टर को धता बताते हुए यहां 127 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां आज तक किसी प्रकार का आरक्षण हुआ ही नहीं। इनमें कई बड़ी ग्राम पंचायतें भी हैं।
जिले में जगन्नाथपुर ग्रंट, बस्तीखास, हाजीजोत, सीतारामपुर ग्रंट, खम्हरिया बुजुर्ग, अलाउद्दीनपुर, अहिरौली, दौलतपुर ग्रंट, नरहरपुर, कूकनगर ग्रंट, घारीघाट, भर्तीपुर, शीतलगंज ग्रंट, पतिजिया बुजुर्ग, नरायनपुर, वीरापुर, पिपरा खुर्द, पथरौली आदि ग्राम पंचायतें हैं। इनमें आरक्षण का जादू कभी नहीं चला।
पंचायतों के पुनर्गठन के लिए परिसीमन का कार्य पूरा न होने के कारण यहां आरक्षण का पुराना रोस्टर ही लागू होगा। पुराने रोस्टर के अनुसार आरक्षण तय किया जाएगा। जो ग्राम पंचायतें आरक्षित हो चुकी हैं, वहां वह दोबारा उस आरक्षण में नहीं किया जाएगा।
लेकिन जोड़तोड़ की राजनीति के चलते यहां कुछ भी हो सकता है। इस पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले तथा माननीयों की नजर भी गड़ी है। माना जा रहा है कि आरक्षण में यदि खेल होगा तो कई लोग कोर्ट जा सकते हैं।
पंचायत निर्वाचन में शासन द्वारा निर्धारित आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाएगा। इसके लिए कोई जोड़तोड़ नहीं चलेगा। आरक्षण के लिए शीघ्र ही लखनऊ में सभी डीपीआरओ व अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत का प्रशिक्षण होने वाला है। वहां आरक्षण प्रक्रिया पूरी तरह साफ हो जाएगी कि किस तरह का आरक्षण और कैसे किया जाएगा।
-आरएस चौधरी, जिला पंचायत राज अधिकारी गोंडा