गोंडा में रुपये निकालती बीसी सखी। स्रोत: विभाग
गोंडा। नई बायोमीट्रिक डिवाइस खरीदने के बाद भी आईडी बंद होने की वजह से जिले की अधिकांश बीसी सखियों का काम महीनों से ठप है। इसका असर गांवों की बैंकिंग व्यवस्था पर भी पड़ा है। पेंशन, मनरेगा मजदूरी और किसान सम्मान निधि की राशि निकालने के लिए ग्रामीणों, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अनुसार, बीसी सखियों को बैंकिंग सेवाएं शुरू करने के लिए 75 हजार रुपये का सपोर्ट फंड दिया जाता है। इसी से वे बायोमीट्रिक डिवाइस खरीदकर गांवों में बैंकिंग सेवाएं देती हैं। बाद में यह राशि चार प्रतिशत ब्याज के साथ वापस ली जाती है।
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक पेनियरबाई कंपनी पार्टनर एजेंसी के रूप में कार्य कर रही थी और सभी बीसी सखियां इससे जुड़ी थीं। कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के बाद बीसी सखियों को पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया से जोड़ा जा रहा है।
ब्लॉक मिशन मैनेजर अंशुमान तिवारी ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने पर बीसी सखियां नकद लेनदेन के साथ नया खाता खोलने, बीमा और अन्य बैंकिंग सेवाएं भी गांव स्तर पर उपलब्ध करा सकेंगी।
दूसरी ओर, बीसी सखियों का कहना है कि चयन के समय विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई मशीनें एक-दो वर्ष में ही खराब हो गईं। कई बीसी सखियों की आईडी एक वर्ष से बंद है, जिससे उनका काम पूरी तरह ठप हो गया।