अफसर यदि अपने मातहतों के काम पर नजर रखें तो व्यवस्था सुधर सकती है लेकिन सिंचाई विभाग में मामला बिल्कुल उल्टा है। चित्तौड़गढ़ जलाशय की सिल्ट सफाई में करोड़ों रुपये का काम कागजों में किया गया है उसकी जांच के लिए अफसरों के पास समय ही नहीं है।
मामला बलरामपुर जिले के चित्तौड़गढ़ से जुड़ा है। जलाशय तथा उससे निकली नहरों में उल्टा सफाई के लिए मिले करीब एक करोड़ रुपये की बंदरबांट कागजों में करने का मामला प्रकाश में आया है। आरटीआई कार्यकर्ता ग्राम श्रीनगर निवासी दीप नरायन मिश्र ने डीएम व मुख्यमंत्री आदि को शिकायत कर कहा है कि चित्तौड़गढ़ जलाशय व नहरों की सिल्ट सफाई में भारी अनियमितता की गई है।
डीएम के आदेश के बावजूद अवर अभियंताओं ने बगैर टेंडर के ही करीब एक करोड़ का काम कागजों में कराया गया है। काम कराने में भी अनियमितता की गई है। मामला अक्तूबर 2016 से मार्च 2017 के बीच का है। एक दो जगह तो थोड़ा बहुत काम हुुआ बाकी पैसा बिना काम कराए ही हड़प लिया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर प्रमुख सचिव सिंचाई ने मामले की जांच अधीक्षण अभियंता गोंडा की सौंपी है। अधीक्षण अभियंता ने इस संबंध में शिकायतकर्ता से शपथ पत्र व साक्ष्य भी ले लिया है लेकिन अब मामले की जांच के लिए उनके पास समय ही नहीं है।
स्थानीय अफसरों का ये हाल है कि डीएम ने मामले में दो बार संबंधित एक्सईएन बाबूलाल ने रिपोर्ट नहीं दी है। शनिवार को मामले के बारे में पूछने पर मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता ड्रेनेज मंडल गोंडा एमडी सिंह ने बताया कि शिकायत की जांच के लिए मेरे पास समय नहीं है अभी मैं प्रोजेक्ट वर्क में बिजी हूं। इसलिए चित्तौड़गढ़ जलाशय घोटाले की जांच में समय लगेगा।