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पांच डॉक्टर कैसे कर पाएंगे पांच लाख बच्चों का इलाज

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गोंडा। कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर में बच्चों के अधिक प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। जिले में बच्चों की आबादी करीब पांच लाख तक बताई जा रही है। जिनके सापेक्ष जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में सिर्फ एक-एक बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती है। वहीं 50 प्राथमिक व 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से सिर्फ तीन पर बच्चों के डॉक्टरों की तैनाती है।
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कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा तैयारियों में जुटा हुआ है। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा।
जिसको ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल के बगल 10 बेड का पीकू वार्ड तथा कोविड अस्पताल में 50 बेड वाला पीआईसीयू सक्रिय करने की तैयारी है। लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों की कमी स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रही है। जिले में बच्चों की आबादी करीब पांच लाख बताई जा रही है।
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वहीं जिला अस्पताल में एक नियमित बालरोग विशेषज्ञ डॉ आरएस गुप्ता की तैनाती है तथा वहीं डॉ विकास चंद्र गुप्ता सेवानिवृत्त होने के बाद संविदा पर सेवा दे रहे हैं। अस्पताल कर्मचारियों की माने तो डॉ विकास चन्द्र गुप्ता कभी कभार ही अस्पताल आते हैं। वहीं महिला अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ के रुप मे डॉ राम लखन की तैनाती है तथा एनआरएचएम की ओर से डॉक्टर परवेज इकबाल सेवा दे रहे हैं।
जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा 50 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। यहां सामान्य डॉक्टरों के सहारे बच्चों का इलाज किया जाता है। गंभीर स्थित होने पर मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
वहीं नवाबगंज करनैलगंज सहित तीन सीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञों की तैनाती है लेकिन वहां भी बच्चों के इलाज के लिए उचित संसाधन व पीआईसीयू की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर में पांच लाख बच्चों का इलाज पांच डॉक्टरों के सहारे किया जाना मुश्किल लग रहा है।
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