परीक्षा केंद्रों पर छात्र संख्या आवंटन के मुद्दे पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों की चुप्पी स्कूल के प्रबंधकों/प्रधानाचार्यो को भारी पड़ रही है। बोर्ड परीक्षा में अब मात्र 11 दिन बचे हैं लेकिन कौन से सेंटर पर कितने छात्र परीक्षा देंगे इसका डाटा अफसर अब तक नही तैयार कर सके हैं। छात्र संख्या आवंटन को लेकर विभागीय अफसरों के इस रवैये से परीक्षा केंद्र वाले स्कूलों के संचालक असमंजस में है और परीक्षा की तैयारियां ठप पड़ी है।
हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 16 मार्च से शुरु हो रही है।इस परीक्षा के लिए जिल भर में 224 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। इन परीक्षा केंद्रो पर हाईस्कूल के 58340 व इंटरमीडिएट के 46178 परीक्षार्थियों को परीक्षा देनी है।
जिलाधिकारी इन परीक्षाओं में नकल को रोकने और पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षा संपन्न कराने का निर्देश माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों को दे चुके है लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसर इस परीक्षा को लेकर संजीदा नही दिख रहे है।
हालांकि जिला विद्यालय निरीक्षक परीक्षा की तैयारियों को पूरा कर लिए जाने का दावा कर रहे है लेकिन उनका यह दावा हकीकत से कोसो दूर नजर आ रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि परीक्षा शुरु होने में मात्र 10 दिन शेष बचा है और अब तक माध्यमिक शिक्षा विभाग की तैयारी परीक्षा केंद्र निर्धारण से आगे नही बढ़ सकी है।
अब तक न तो परीक्षा देने वाले छात्रों को प्रवेश पत्र मिल सका है और न ही परीक्षा केंद्र बनाए गए स्कूलों को छात्र संख्या का आवंटन ही किया गया है। ऐसे में परीक्षा सेंटर बनाए गए स्कूलों में कितने छात्र परीक्षा देंगे इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
स्कूल के प्रबंधकों का कहना है कि छात्र संख्या की जानकारी न होने पर तैयारियंा प्रभावित हो रही है। इनका कहना है कि वास्तविक संख्या की समय से जानकारी हो जाने पर स्कूलों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल जाता है लेकिन इस बार छात्र संख्या की स्थिति स्पष्ट न होने से उन्हे कितने बच्चों की व्यवस्था करनी है इसको लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और परीक्षा की तैयारियां ठप पड़ी है।
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छात्र आवंटन में देरी पर खेल की संभावना बढ़ी
गोंडा। बोर्ड परीक्षा में छात्र संख्या आवंटन में होने वाला लेनदेन जगजाहिर है। इसके तहत अधिक रसूख वाले सेंटर को उसकी क्षमता से अधिक छात्र संख्या का आवंटन कर दिया जाता है जबकि इस हुनर में पीछे रह जाने वाले साफ सुथरे परीक्षा केंद्रों को कम छात्र संख्या से संतोष करना पड़ता है। माना जा रहा है इसी खेल को लेकर इस वर्ष भी छात्र संख्या आवंटन में देरी की जा रही है ताकि परीक्षा के ऐन समय पर छात्र संख्या की जानकारी मिलने पर कोई इसका विरोध न कर सके।