गोंडा। भले ही स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित मातृत्व दिवस आयोजित कर गर्भवती की बेहतर देखरेख का दावा कर रहा हो लेकिन हकीकत दावे से इतर है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती की जरूरी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं जिला महिला अस्पताल में भी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण अल्ट्रासाउंड की जांच नहीं हो पाती। ऐसे में गर्भवती को अल्ट्रासाउंड के लिए खाली पेट भटकना पड़ता है।
प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी गर्भवती का मुफ्त में अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांच कराने का निर्देश है। मगर, यह योजना सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 50 हजार गर्भवती को चिकित्सीय देखरेख व इलाज की सुविधा दी जा रही है लेकिन अल्ट्रासाउंड जांच की समुचित व्यवस्था न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जिला महिला चिकित्सालय में रोजाना औसतन पांच सौ मरीज आते हैं। इनमें ज्यादातर गर्भवती होती हैं। गर्भधारण करने से लेकर प्रसव तक लगभग हर महीने इनकी अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच होती है। गर्भ के तीन महीने तक तो पांच जांचें अनिवार्य हैं। इनमें से गर्भधारण, गर्भ की स्थिति, यूरिन, एचआईवी, आरएच फैक्टर और बायोकेमिस्ट्री जांच के बिना इलाज आगे नहीं बढ़ता।
वहीं, महिला अस्पताल आने वाली ज्यादातर गर्भवतियों को शुरुआत से ही मायूसी हाथ लगती है। यहां रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति पता करना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में जब उन्हें आराम की जरूरत होती है तो वे महिला अस्पताल और जिला अस्पताल के बीच अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच के लिए भटक रही होती हैं। यह स्थिति उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित होती है।
सप्ताह में तीन दिन ही हो पाती अल्ट्रासाउंड की जांच
महिला अस्पताल में रेडियोलॉस्टि की नियुक्ति न होने के कारण हर रोज अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पाती। सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह के मुताबिक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की कई बार मांग की गयी लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दूसरे डॉक्टर के सहयोग से सप्ताह के तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाती है। प्रयास किया जाता कि जिस दिन अल्ट्रासाउंड जांच हो उसी दिन जांच के लिए लिखा जाय।
सीएचसी पर भी अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था नहीं
जिले के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से सिर्फ सीएचसी करनैलगंज में ही अल्ट्रासाउंड मशीन है जिससे गर्भवती को लंबा सफर तय कर मुख्यालय आना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपिया में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से यहां की गर्भवती को 55 किमी. यात्रा कर जिला महिला अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में उनकी परेशानी बढ़ने के साथ गर्भस्थ शिशु पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका होती है। सीएचसी परसपुर को कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गोद लिया है लेकिन यहां भी अल्ट्रासाउंड जांच न होने के कारण गर्भवती को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा प्रदान करने के लिए कई बार पत्राचार किया गया लेकिन बजट के अभाव के चलते व्यवस्था नहीं हो पायी। प्रयास किया जा रहा हैै कि चारों तहसीलों के कम से कम एक सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था कर दी जाय। डॉ. एपी सिंह, एसीएमओ