गोंडा। दुष्कर्म का दंश झेलने के बाद न्याय की लड़ाई लड़ रहीं 17 पीड़िताओं को अब आर्थिक मदद का इंतजार है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार उत्पीड़न योजना के तहत जिले में एक अप्रैल 2025 से अब तक दुष्कर्म के 25 मामलों में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किए जा चुके हैं। इनमें आठ पीड़िताओं को आर्थिक सहायता मिल चुकी है। 17 मामलों में अभी मुआवजा राशि नहीं मिल सकी है। इसके लिए करीब 3.86 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। जिला स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बजट का इंतजार है।
योजना के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की गंभीर अपराधों की पीड़िताओं को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। दुष्कर्म के मामलों में एफआईआर, चिकित्सकीय जांच और विवेचना की प्रगति के आधार पर सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से दी जाती है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिकए जिले में 25 मामलों में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद पीड़िताओं को निर्धारित सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
दुष्कर्म में पांच लाख, सामूहिक दुष्कर्म में 8.25 लाख तक मदद
योजना के तहत दुष्कर्म की पीड़िता को अधिकतम पांच लाख रुपये तक आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में यह राशि 8.25 लाख रुपये तक हो सकती है। सहायता राशि एक साथ नहीं, बल्कि तीन चरणों में दी जाती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद चिकित्सकीय जांच एवं पुष्टि के आधार पर निर्धारित सहायता राशि का 50 प्रतिशत दिया जाता है। आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल होने पर 25 प्रतिशत और न्यायालय से मामले का निस्तारण होने के बाद शेष 25 प्रतिशत राशि देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य पीड़िता को मुकदमे की अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के दौरान आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है।
बजट के अभाव में अटकी मदद
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार कई मामलों में सहायता राशि समय से नहीं मिल पाने की प्रमुख वजह बजट की उपलब्धता नहीं होना रही। अब लंबित 17 मामलों में जिला स्तर पर आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। करीब 3.86 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। बजट उपलब्ध होने पर पीड़िताओं को नियमानुसार सहायता राशि देने की बात कही जा रही है। योजना के तहत सहायता राशि मिलने के बाद यदि न्यायालय में मामला गलत साबित होता है तो नियमानुसार मुआवजा वापस लेने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, जिले में अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि मुआवजा देने के बाद अदालत में मामला गलत साबित होने पर किसी पीड़िता से धनराशि वापस लेने का कोई प्रकरण जिले में नहीं है। लंबित 17 मामलों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं। करीब तीन करोड़ 86 लाख रुपये के बजट की मांग की गई है। बजट उपलब्ध होते ही पीड़िताओं को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।
पीड़िता बोलीं - आर्थिक मदद से मिल सकता है सहारा
देहात कोतवाली में मई 2025 में दुष्कर्म का एक मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपपत्र न्यायालय भेज दिया, लेकिन पीड़िता को अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। पीड़िता का कहना है कि वह कई बार अधिकारियों से मिल चुकी है। हर बार बजट उपलब्ध नहीं होने की बात बताई जाती है।
इटियाथोक क्षेत्र के एक अन्य मामले में भी पीड़िता ने बताया कि अधिकारियों की ओर से सहयोग किया जा रहा है, लेकिन बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण सहायता राशि नहीं मिल सकी। पीड़िताओं का कहना है कि मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया के बीच आर्थिक मदद मिलने से उन्हें काफी सहारा मिल सकता है।