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हाई वोल्टेज से लाखों के उपकरण फुंके

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गोंडा। नगर के गायत्रीपुरम, नैयर कॉलोनी व सिविल लाइन क्षेत्र के करीब 20 हजार लोग बुधवार की दोपहर से लेकर रात तक बिजली के लिए तरसते रहे। इस पूरे क्षेत्र में हाई वोल्टेज हो जाने के कारण लाखों रुपये के बिजली उपकरण फुंक गए। लोग जैसे ही पंखा या बल्व आन करते वह दग जाता। डीएम आवास व कार्यालय भी सिविल लाइन एरिया में है। जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल ने बिजली की समस्या का रात में संज्ञान लिया और अधिशाषी अभियंता से जानकारी तलब की। इसके बाद पूरी रात कसरत होती रही, 12 बजे रात में बिजली मिली लेकिन हाई व लो वोल्टेज होती रही। गुरुवार की दोपहर दो बजे तक बिजली व्यवस्था बहाल हो पाई।
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पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली के सप्लाई की स्थिति का ही पता नहीं रहता है। हाल यह है कि किसी क्षेत्र में लाइन हाई है या लो, किसी भी बात की खबर नहीं रहती। अभियंताओं का हाल तो यह है कि थोड़े से विवाद को तो पहाड़ बनाने में पीछे नही हैं लेकिन जन समस्याओं के निस्तारण के लिए गंभीर नहीं हैं। सिविल लाइन क्षेत्र के गायत्रीपुरम निहालपुरवा, नैय्यर कालोनी में बुधवार की दोहपर दो बजे बिजली हाई वोल्टेज में आ गई। इसके बाद तो बिजली की व्यवस्था में दो घंटे तक सुधार नहीं हुआ तो लोगों ने पावर कॉर्पोरेशन को सूचना दी, फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ।
दोपहर में तीन बजे अवर अभियंता को जानकारी दी गई। मोहल्ले के लोग पूरे दिन परेशान रहे और कोई सुधार न होने पर एसडीओ को शाम छह बजे स्थिति की जानकारी दी गई। उन्होंने बिजली सुधार कराने के लिए कार्रवाई करने का भरोसा दिया। इसके बाद भी आठ बजे तक कोई सुधार न होने पर जिलाधिकारी के सामने मामला गया। जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता से स्थिति की जानकारी की। इसके बाद रात 12 बजे तक बिजली सुधार के कार्य हुए, फिर भी बिजली में आंशिक सुधार ही हो पाया। गुरुवार की सुबह फिर कार्य शुरू हुआ और दोपहर करीब दो बजे तक बिजली की व्यवस्था सुधर सकी।
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सात घंटे तक पावर कार्पोरेशन की चुप्पी चौंकाने वाली
गायत्रीपुरम की बिजली हाई दोपहर में करीब एक बजे हुई और जिलाधिकारी के पास मामला रात में करीब आठ बजे गया। ऐसे में सात घंटे तक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की अनदेखी चौंकाने वाली है। हर मामले में जिलाधिकारी तक मामला कोई कैसे पहुंचाए और उन्हें हर बात के लिए दखल देना पडे़। ऐसा तो संभव नहीं है, विभाग के अधिकारियों के संजीदा न होने से जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जिलाधिकारी का निर्देश मिलने के बाद तत्काल बिजली सुधार के लिए टीम भेजा गया। फाल्ट खोजने में वक्त लगता है। इसलिए सुधार में समय लगा। उसके पहले भी जेई और एसडीओ बिजली सुधार के लिए कार्य कर रहे थे। -अशोक यादव, अधिशाषी अभियंता
बिजली के समस्या की जानकारी मिलते ही अधिशाषी अभियंता को निर्देश दिया गया। उन्होंने सुधार की कार्रवाई की और बराबर फीडबैक भी लिया गया। पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों को बिजली समस्याओं को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया गया है। -डॉ. नितिन बसंल, जिलाधिकारी
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