गोंडा। नए साल के आगमन के साथ ही साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं। हैप्पी न्यू ईयर के नाम से भेजे जा रहे मेसेज के जरिये लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। अनजान नंबरों से भेजे जा रहे इन संदेशों में गिफ्ट के लालच में एंड्रॉयड पैकेज किट (एपीके) फाइल या संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं, जिन पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन हैक हो जा रहा है।
साइबर ठग इस तरीके से मोबाइल की निजी जानकारी, ओटीपी और बैंकिंग डाटा तक पहुंच बना ले रहे हैं। इसके बाद बैंक खातों से रुपये उड़ाए जा रहे हैं। कई मामलों में पीड़ितों के खाते पूरी तरह खाली हो चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एपीके फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होते ही कई तरह की अनुमति मांग लेती है। अनुमति मिलते ही साइबर अपराधियों का आपके फोन पर नियंत्रण हो जाता है।
साइबर विशेषज्ञ हरिओम टंडन ने लोगों को आगाह किया है कि अनजान नंबर से आने वाली किसी भी एपीके फाइल या लिंक पर क्लिक न करें। साइबर अपराधी बिजली बिल अधिक आने, चालान कटने, लोन ऑफर और न्यू ईयर गिफ्ट जैसे संदेश भेजकर लोगों को डराने या लालच देने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस और साइबर सेल लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। यदि किसी के साथ साइबर ठगी की घटना होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी थाने में सूचना दें।
वापस कराए 97 हजार रुपये
इटियाथोक के सुनील कुमार के मोबाइल पर एपीके फाइल में नव वर्ष का संदेश आया। इसे उन्होंने ओपन कर दिया। जब तक वह कुछ समझ पाते तब तक वह साइबर ठगों के शिकार हो गए। 97,960 रुपये की ठगी की शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई थी। शिकायत मिलते ही साइबर हेल्पडेस्क टीम सक्रिय हुई और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करते हुए संबंधित बैंक से संपर्क कर धनराशि पीड़ित के खाते में वापस कराई गई। नवाबगंज के अनिल पाल सिंह का भी पैसा साइबर टीम ने वापस कराया।
साइबर ठगी से बचाव के लिए यह करें
- ऑनलाइन लेनदेन में सावधानी बरतें।
- किसी भी अनजान फोन कॉल पर अपनी बैंक डिटेल, ओटीपी, बायोमैट्रिक डेटा, पैन कार्ड व आधार कार्ड की डिटेल किसी के साथ साझा न करें।
- सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
-अनजान लिंक्स पर क्लिक न करें।
- अपने डिवाइस को सुरक्षित रखें।
- ऑनलाइन शॉपिंग में सुरक्षित वेबसाइट्स का उपयोग करें।
- पासवर्ड को मजबूत और गुप्त रखें।
- ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखें।
- साइबर बुलिंग और साइबर स्टॉकिंग के मामलों में तुरंत पुलिस को सूचित करें।
- ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में कंपनी प्रबंधन और पुलिस को सूचित करें।
(पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के अनुसार)