डिग्री के फेर में फंसे 34 शिक्षकों की सुनवाई पूरी
बीएसए ने सुना जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों का पक्ष, अब शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। बेसिक शिक्षा के जूनियर हाईस्कूल में चार साल पहले नियुक्ति पाए सहायक अध्यापकों में 34 शिक्षकों के योग्यता विवाद मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। जिले में सितंबर 2015 में गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापक के 608 पदों पर सीधी भर्ती हुई थी। इसमें स्नातक में गणित व विज्ञान विषय के साथ ही बीएड व जूनियर हाईस्कूल स्तर की टीईटी उत्तीर्ण लोगों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई थी। इसमें उस समय बीटेक, बीएससी कृषि, गृह विज्ञान, बीएएमएस, बीयूएमएस आदि के बाद बीएड डिग्री वालों को भी गणित व विज्ञान के बराबर मान कर नियुक्ति दे दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट में गणित व विज्ञान के बराबर इन व्यावसायिक शिक्षा की डिग्री को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शासन से इसके बाद अब इन डिग्रीधारकों के बारे में निर्णय लेने का आदेश जारी हुआ था। विभाग की जांच में जिले में 34 शिक्षक कार्रवाई के दायरे में आए थे। बीएसए ने नोटिस जारी कर शिक्षकों को पक्ष रखने का अवसर दिया और 13 जनवरी को पूरी सुनवाई की। बेसिक शिक्षा के जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए वर्ष 2013 में सीधी भर्ती से गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापक के पर नियुक्ति की कार्रवाई शुरू हुई थी। विभाग ने 29825 शिक्षक भर्ती से जिले में गणित विषय के 304 व विज्ञान विषय के लिए भी 304 सहायक अध्यापक के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई जो वर्ष 2015 में सितंबर माह में पूरी हो सकी। 23 सितंबर 2015 को गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापक के नियुक्ति आदेश जारी हुई। इसमें बीटेक के बाद बीएड करने वालों को गणित स्नातक व कृषि से स्नातक उत्तीर्ण को विज्ञान के ग्रुप में शामिल किया गया। इन बदलावों के बाद सहायक अध्यापक के चयन बीटेक व कृषि शिक्षा से स्नातक व प्रशिक्षित लोगों का चयन हो गया। चार साल से सहायक अध्यापक के रूप में कार्य कर चुके शिक्षकों को नोटिस मिली तो खलबली मच गई। शिक्षकों ने बीएसए को चयन के समय में जारी हुए आदेशों कि जानकारी देते हुए पक्ष रखा कि चयन नियमों के तहत किया गया है।
इनसेट
बेसिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में तय हुई थी योग्यता
जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक के पदों पर चयन के लिए व्यावसायिक शिक्षा को शामिल किए जाने का फैसला निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने किया था। जिसमें प्रोफेशनल कोर्स को गणित व विज्ञान में शामिल किया गया था। इसके बाद ही आवेदन किए और चयनित भी हुए। अब चार साल बाद योग्यता को लेकर विवाद शुरू होने से कई तरह की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
वर्जन
शासन के आदेश पर ऐसे सहायक अध्यापकों को चिह्नित किया गया है और उनको अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। शिक्षकों ने अपना दे दिया है परीक्षण करके रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-मनिराम सिंह, बीएसए