फोटो-7 गोंडा में स्वास्थ्य कार्यशाला का उद्घाटन करते एसीएमओ डॉ. एपी सिंह। -संवाद
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गोंडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदत्त योजनाओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में गोंडा का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। अप्रैल से लेकर नवंबर 2021 तक के लिए यूपीएचएमआईएस की ओर से जारी टॉप रैंकिंग वाले प्रदेश के जिलों की सूची में गोंडा को गाजियाबाद के बाद दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस केसरी ने दी। वह मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सी-फार) संस्था के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सेदारी कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश में दूसरा स्थान पाने की उपलब्धि जिले में कार्यरत सभी स्वास्थ्यकर्मियों व चिकित्सकों के सहयोग से ही संभव हो पाया है। कहा कि चिकित्सा सेवाओं व स्वास्थ्य योजनाओं में नित नए बदलाव होते रहते हैं। इसकी जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अहम होती है। इससे जागरूकता के साथ ही समुदाय की आखिरी पंक्ति तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में आसानी होगी। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी सिंह ने प्रजनन स्वास्थ्य, मातृत्व स्वास्थ्य, नवजात शिशु स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य एवं किशोर स्वास्थ्य मुद्दों पर जानकारी दी तथा एनएचएम के तहत संचालित कार्यक्रमों प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की।
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के बारे मे जानकारी देते हुए जिला समन्वयक विवेक सरन ने बताया कि जिले में एक अप्रैल 2018 से अब तक 24,083 टीबी के मरीज चिन्हित किए गए। इनमें से 75 प्रतिशत मरीजों को पोषण योजना के अंतर्गत पांच सौ रुपये प्रतिमाह का लाभ दिलाया जा रहा है। इसके अलावा मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जिले के कुल 1400 टीबी के मरीजों को गोद लेने के लिए दिये गए लक्ष्य के सापेक्ष अब तक विभिन्न संस्थाओं, स्कूलों, एनजीओ तथा अधिकारियों की ओर से 860 मरीजों को गोद लिया गया है। जिला मलेरिया अधिकारी मंजुला आनंद ने वेक्टर जनित रोगों पर चर्चा की। उन्होंने फाइलेरिया की रोकथाम के लिए फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करना अनिवार्य बताया।