पढ़ाई के लिए नाले में उतरकर स्कूल जाने की पीड़ा कैसी होती है, यह बेसलर के कंपोजिट विद्यालय सेमरी कला के छात्रों से पूछिए। नाले पर पुलिया न होने की वजह से 10 साल से वे यह त्रासदी झेल रहे थे।
उनके दर्द को देखते हुए प्रधानाध्यापक संत कुमार तिवारी ने पहल की और गांव के ही कुछ अभिभावकों के साथ मिलकर लकड़ी की अस्थायी पुलिया तैयार करवा दी। अब स्कूल खुलने पर बच्चे आराम से स्कूल आ-जा सकेंगे।
शिक्षा क्षेत्र बेलसर के कंपोजिट विद्यालय सेमरी कला पूरे पासी में 2010 में यह कंपोजिट स्कूल बना था। प्रधानाध्यापक संत कुमार तिवारी ने बताया कि विद्यालय के चारो तरफ सोतिया नाले का पानी भर जाने के कारण बच्चों को एक किमी से अधिक का चक्कर काटना पड़ता था। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष यदुनाथ से बात की।
यदुनाथ ने गांव के विद्या, राम लौटन, दान बहादुर, रमेश, लल्लू से बात की और इन सभी लोगों ने शारीरिक श्रम करने की बात कही। यहां पर तैनात सहायक अध्यापक नरेंद्र मिश्र ने दो सफेदे के पेड़ दान किए। सफेदे के छह पेड़ खरीदे गये।
वे बताते हैं कि नाले पर पुलिया बनाने के लिए मैंने अभिभावकों से बात की। अपने स्तर से जो हो सकता था मदद की तो गांव के लोग भी तैयार हो गये। अब लकड़ी व पटरे की पुलिया बनकर करीब-करीब तैयार हो गई है। स्कूल खुलने पर बच्चों को इस त्रासदी से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।
कंपोजिट स्कूल सेमरी कला पूरे पासी के सामने सोतिया नाले में अधिक पानी आ गया है। इससे चारों ओर पानी भरा है, स्कूल के शिक्षकों और प्रबंध समिति के सहयोग से अस्थायी पुलिया बनाई गई है। बीडीओ को पहले ही रिपोर्ट दी गई थी, जल्द ही पुलिया भी बन जाएगी।
-आनंद प्रकाश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी