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सुना है क्या: केस ही कर दिया क्रैक और मेहनत की कीमत; फोटो क्लिक से साहब खुश के पढ़ें किस्से

Sat, 09 May 2026 12:24 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'केस ही कर दिया क्रैक' की कहानी। इसके अलावा 'मेहनत की कीमत' और 'फोटो क्लिक, साहब खुश' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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केस ही कर दिया क्रैक

एक एजेंसी में शातिर घोटालेबाजों को पकड़ने के लिए क्रैक टीम बनाई गई। अफसर-मातहत सभी खुश थे। इनाम बांटने के साथ शाबाशी मिल रही थी। इसी बीच किसी ने खेल कर दिया। आरोपियों से मिलकर केस ही दफन करा दिया। 

अब इसका आदेश जिसकी मेज पर जाता है, वह पढ़कर सन्न हो जाता है। नीचे वालों की लिखा-पढ़ी पर मुहर लगाने में उनके हाथ कांप रहे हैं कि दूसरे के चक्कर में कहीं अपनी गर्दन न फंस जाए।

मेहनत की कीमत

पश्चिम बंगाल के चुनाव में सूबे के कई माननीयों की ड्यूटी लगी थी और उन्होंने कड़ी मेहनत भी की थी। अब बारी है मेहनत की कीमत वसूलने की। चूकि सूबे में भी अब कुर्सी की रेवड़ी बंटने वाली है लिहाजा ड्यूटी करने वाले एक माननीय अब अपनी फील्डिंग सजाने में जुटे हैं। 

माननीय का ओहदा अभी राज्य का है जिसे बढ़ाकर वें कैबिनेट करना चाहते हैं। साथ ही पुरस्कार के तौर पर महकमा भी ऐसा चाहते हैं की पश्चिम बंगाल की सारी थकान उतर जाये। इसके लिए माननीय ड्यूटी लगाने वाले बॉस को अपनी मेहनत का रिपोर्ट कार्ड देकर आये हैं। ताकि उनकी मेहनत की कीमत लगाने में कोई चूक न रहने पाए।
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फोटो क्लिक, साहब खुश

नवाबी नगरी में आईपीएल की खुमारी चढ़ी हुई है। कई ऐसे साहब हैं, जो लगभग हर मैच देखने स्टेडियम पहुंच रहे हैं। इनमें पुलिस विभाग के भी वरिष्ठ साहब शामिल हैं। इस बार भी वह पहुंचे। नामचीन हस्तियों के साथ बैठक जमाई और मैच का लुत्फ भी उठाया। 

साहब फिराक में थे कि किसी तरह टीम मालिक के साथ एक फ्रेम बन जाए। ज्यादा देर नहीं हुई और उनकी मुराद पूरी हो गई। टीम मालिक के साथ दबी हुई मुस्कुराहट के साथ फोटो खिंच ही गई। फिर क्या था, साहब पूरी तरह खुश हो गए।
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