नवाबगंज। लौव्वा वीरपुर गांव का एक किशोर तीन साल पहले पिता की डांट के बाद लापता हो गया था। वह उन्नाव में एक दुकान पर काम करने लगा। तीन साल बाद दुकान पर पहुंचे रिटायर्ड दरोगा धर्मपाल सिंह की सक्रियता से किशोर अपनों से मिल सका। बेटे के घर लौटते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
लौव्वा वीरपुर निवासी शेर सिंह का 12 वर्षीय पुत्र हरीश सिंह वर्ष 2023 में नाराज होकर बाजार जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। पिता की तहरीर पर चार जुलाई 2023 को थाने में गुमशुदगी दर्ज की गई थी। परिजनों के अनुसार, पिता की डांट से नाराज होकर हरीश घर से निकलकर अयोध्या पहुंचा। वहां से अपनी बुआ के घर लखनऊ जाने के लिए बस में बैठा, लेकिन उन्नाव पहुंच गया। बुआ का घर न मिलने पर वह उन्नाव में ही भटकता रहा। बाद में वहां एक ढाबे पर काम करने लगा।
11 दिसंबर को उन्नाव के निवासी और पूर्व में नवाबगंज थाने में तैनात रहे रिटायर्ड दरोगा धर्मपाल सिंह ढाबे पर पहुंचे। बातचीत के दौरान हरीश ने खुद को नवाबगंज के लौव्वा वीरपुर गांव का निवासी बताया। इस पर रिटायर्ड दरोगा ने स्थानीय थाने पर सूचना दी। पुलिस के माध्यम से परिजनों को जानकारी मिली, जिसके बाद परिजन उन्नाव पहुंचे और हरीश को अपने साथ घर ले आए। करीब तीन साल बाद बेटे को सकुशल पाकर परिजनों ने राहत की सांस ली।