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मातम में बदली जन्मदिन की खुशियां, गांव में कोहराम

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गोंडा। मनहना गांव के रहने वाले शिक्षक कृष्ण कुमार सिंह के परिवार में शु्क्रवार की सुबह खुशियों से भरी थी। बेटे उत्कर्ष का जन्मदिन था। परिवार के लोग गुरुवार से ही उत्कर्ष के जन्मदिन की तैयारी में जुटे थे।
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सुबह सभी देवीपाटन शक्तिपीठ दर्शन के लिए रवाना हुए थे। शाम को परिवार के साथ ही गांव के पास पड़ोस के लोगों के अलावा कुछ रिश्तेदारों व संबंधियों की दावत का भी इंतजाम था।
मगर किसी को क्या पता था, माता के दर्शन को जा रहा पूरा परिवार वापस नहीं लौटकर आएगा, बल्कि उनके शव आएंगे। देर शाम जब सभी के शव पहुंचे तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। छह लोगों की मौत से सभी की आंखें नम थी।
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थाना तरबगंज क्षेत्र के मनहना गांव के रहने वाले कृष्ण कुमार सिंह युग निर्माण शक्तिपीठ अमदही में शिक्षक थे। शुक्रवार को उनके बेटे उत्कर्ष (12) का जन्मदिन था। वह अपने परिवार के साथ शुक्रवार की सुबह कार से दर्शन करने के लिए बलरामपुर के तुलसीपुर स्थित देवीपाटन शक्तिपीठ जा रहे थे।
रास्ते में बलरामपुर के शिवानगर चयपुरवा के पास सामने से आ रेह बाइक सवार से टकराकर कार अनियंत्रित होकर गहरे गड्ढे में गिर गई। जिसमें कृष्ण कुमार सिंह (39), स्नेहलता (35) पत्नी कृष्ण कुमार सिंह, उत्कर्ष (12) पुत्र कृष्ण कुमार सिंह, मनु पुत्री कृष्ण कुमार सिंह (15), गांव के रघुवीर सिंह की पुत्री सौम्या उर्फ पन्नू (14) व इसी गांव के कार चालक शत्रुध्न सिंह (52) की मौत हो गई। उत्कर्ष के जन्मदिन की गुरुवार से ही तैयारी चल रही थी।
देर शाम परिवार के लोगों के साथ आस-पड़ोस व रिश्तेदार संबंधियों की दावत की भी तैयारी थी। शुक्रवार को पूरा परिवार कार से देवीपाटन शक्तिपीठ दर्शन के लिए रवाना हुआ था।
मगर किसी को क्या मालूम था कि पूरा परिवार वापस लौटकर नहीं आएगा बल्कि उनके शव आएंगे। देर शाम सभी के शव गांव में पहुंचे तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। मौत के खबर की सूचना पर कृष्ण कुमार के घर पर रिस्तेदारों व संबंधियों की भीड़ जमा था। आने वाला हर कोई कुनबे के लोगों को ढांढस बंधाने में लगा था।
मनहना गांव के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गुड्डू सिंह ने बताया कि कृष्ण कुमार सिंह अपने भाईयों में सबसे छोटे थे। सबसे बड़े भाई जिसमें कृष्ण गोपाल सिंह बलरामपुर चीनी मिल में नौकरी करते हैं।
दूसरे नंबर पर कृष्ण मोहन सिंह नवाबगंज में नौकरी करते हैं, जबकि तीसरे भाई माधवराज राजस्थान में रहकर नौकरी करते हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि भाईयों में सबसे छोटा होने के कारण कृष्ण कुमार सभी भाईयों के दुलारे थे। नौकरी के कारण उनके कोई भी भाई गांव में नहीं रहते थे। परिवार के साथ घर व खेती की भी जिम्मेदारी कृष्ण कुमार सिंह पर ही थी।
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