गुरुवार से यह प्रतिबंध लागू हो जाएगा लेकिन बुधवार को लोग पॉलीथिन पैकेट में सामान भर कर जा रहे थे और दुकानों पर प्लास्टिक के गिलास आदि सामान बिक रहे थे। पॉलीथिन बैग, गिलास व अन्य प्लास्टिक के सामानों की बिक्री रोकने के लिए प्रशासन ने कोई टीम नहीं गठित की है न ही इसके खिलाफ कोई अभियान चलाया गया है।
झोला नहीं पॉलीबैग में दे रहे सामान
गोंडा। नगर से गांव तक हर जगह पॉलीथिन, पॉलीबैग व खाने पीने के लिए प्लास्टिक की थाली व गिलास यहां तक प्लास्टिक के चम्मच भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। प्लास्टिक के चम्मच पर स्टील कोटे होने से लोग भ्रम में रहते हैं लेकिन इनकी बिक्री बुधवार को भी जारी रही। बस, रेलवे स्टेशनों पर यात्री पॉलीबैग लेकर निकलते हैं। पहले लोग कपड़े का झोला लेकर सब्जी व सामान खरीदने जाते थे लेकिन पॉलीथिन बाजार में आन से झोले पर निर्भरता खत्म हो गई। नगर के व्यापारी रोधे श्याम की मानें तो जिले में हर दिन करीब 10 क्विंटल पॉलीथिन की खपत होती है।
पुराना माल तो निकालना ही है
व्यापारी अतीक अहमद, डब्बू अग्रवाल, कैलाश आदि ने बताया कि प्रतिबंध की जानकारी नहीं है, लेकिन यदि प्रतिबंध लग गया है तो नहीं बेचा जाएगा। लेकिन जो पहले से खरीद कर माल रख लिया गया है उसे बेचना मजबूरी है। आगे अब प्लास्टिक के सामान की जगह कपड़ा या अन्य चीजों से बने झोले की बिक्री की जाएगी।
आदत में शामिल हो गया पॉलीथिन
उपभोक्ता अनिल, रमेश व फरहान ने बताया कि शाम को ऑफिस या काम से लौटने पर सब्जी घर ले जानी रहती है। ऐसे में दुकान पर सब्जी खरीद कर पालीथिन में ही ले जाना मजबूरी है। अब तो मार्केट में प्लास्टिक के मजबूत बैग मिलते हैं जो फटते नहीं। यह आदत में शुमार हो गया है लेकिन यह मानव और पशुओं के लिए खतरनाक है और पर्यावरण के लिए अभिशाप है। प्रतिंबंध लगना जरूरी है। अब हम लोग कपड़े का झोला रखकर निकलेंगे।
टीम गठित कर चलाएंगे अभियान
प्लास्टिक वस्तुओं की बिक्री व प्रयोग पर रोक के लिए अभी टीम नहीं बनाई गई है। शासन का निर्णय है तो इस पर टीम बनाकर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यदि कोई बिक्री करते या प्रयोग करते पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो जेल भी भेजा जाएगा।
-अजय कुमार उपाध्याय, डीएम गोंडा