राजीवगांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) में होने वाले जिले के 2800 मजरों के विद्युतीकरण पर एक बार फिर से ग्रहण लगने के आसार दिखाई पड़ने लगे हैं। इन मजरों के विद्युतीकरण में हैदरबाद की कार्यदायी संस्था वैरीगेट के फर्जीवाड़े का मामला 6 जिलों (जिसमें गोंडा भी शामिल है) में पकड़े जाने के बाद उसका काम पावर कॉर्पोरेशन ने कंपनी से छीनकर अपने हाथ में तो ले लिया है।
लेकिन अब इन इतनी बड़ी संख्या में इन मजरों का विद्युतीकरण कैसे और किस संस्था से कराया जाए। इसका कोई ठोस विकल्प पावर कॉर्पोरेशन अधिकारी नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं। हालत यह है कि बुधवार को इस समस्या के समाधान के लिए आरईसी से गठित जिस निगरानी समिति की बैठक पावर कॉर्पोरेशन के एमडी कैंप कार्यालय में बुलाई गई।
उस बैठक से समिति के अध्यक्ष कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह बिना समस्या का कोई हल निकाले ही वाकआउट कर गए। जिसके बाद बतौर सचिव मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी ने बैठक की मिनट बुक तैयार कर इसपर आखिरी फैसला लिए जाने के लिए इसकी फाइल पावर कारपोरेशन के उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
ढाई लाख आबादी का होगा भला
जिले में 100 से ऊपर और 300 से नीचे की आबादी के ऐसे 2800 मजरे हैं। जिनका विद्युतीकरण केंद्र सरकार की योजना आरजीजीवीवाई में होना है। इन मजरों में एक अनुमान के मुताबिक ढाई लाख आबादी निवास करती हैं, जो आजादी के पहले और आजादी के 67 साल बाद भी अंधेरे में अपना गुजर-बसर कर रही है।
ब्लॉकवार आमंत्रित किए गए टेंडर
जिले के 2800 मजरों में होने विद्युतीकरण के लिए पावर कॉर्पोरेशन के मध्यांचल विद्युत वितरण निगम से आमंत्रित टेंडर विगत 11 जनवरी को एक बार पहले निरस्त हो चुका है। जबकि दोबारा से इसका टेंडर ब्लाकवार आमंत्रित किया गया है। जो 1 फरवरी को पड़ेगा। इससे पहले मजरों के विद्युतीकरण की कार्ययोजना तय करने के लिए ही बुधवार को निगरानी समिति की बैठक आमंत्रित की गई थी। जो सांसद के वाकआउट करने से पूरी नहीं हो सकी।
बैठक में सांसद कीर्तिवर्धन के साथ नहीं पहुंचे कई विधायक
बुधवार को पावर कॉर्पोरेशन के एमडी कैंप कार्यालय पर बुलाई गई जिला निगरानी एवं सतर्कता समिति की बैठक में जहां तीन विधायक पहुंचे ही नहीं तो कुछ विधायक जब तक पहुंचते, बैठक खत्म हो चुकी थी। कैबिनेट मंत्री विनोद कुमार सिंह के साथ समिति के अध्यक्ष कैसरगंज सांसद बृजभूषण सिंह बैठक शुरू होने से पहले ही कैंप कार्यालय पहुंच चुके थे। उनके साथ तरबगंज के विधायक मंजू सिंह भी आए।
वहीं सह अध्यक्ष के तौर पर गोंडा के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह, मुजेहना की विधायक नंदिता शुक्ला, करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह व गौरा के विधायक कुंवर आनंद सिंह आए ही नहीं। वहीं कटराबाजार से विधायक बावन सिंह और मनकापुर के विधायक बाबूलाल बैठक खत्म होने के बाद कैंप कार्यालय पहुंचे। जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय पूरी बैठक में मौजूद रहे।
बुधवार को निगरानी समिति की बैठक में बड़े गांवों का पहले और छोटे गांवों का विद्युतीकरण बाद में किए जाने का प्लान तय हुआ है। सांसद आदर्श गांव का विद्युतीकरण समय से न होने को लेकर बतौर अध्यक्ष कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह नाराज जरूर हुए थे। लेकिन उन्होंने उन्हें आश्वस्त किया है कि जैसे ही काम चालू होता है, वह सबसे पहले आदर्श गांव का ही विद्युतीकरण कराएंगे। -हर्ष मुंशी, मुख्य अभियंता/सचिव जिला निगरानी समिति, आरईसी
जब जिले के अधिकारी मिलकर एक सांसद आदर्श गांव का विद्युतीकरण नहीं करा सकते, तो वह इतनी बड़ी संख्या में जिले के मजरों का विद्युतीकरण स्थानीय स्तर के ठेकेदारों से कैसे करा पाएंगे। आरईसी में विद्युतीकरण के नाम पर सत्ताधारी दल के नेता अधिकारियों के साथ मिलकर इसके पैसे को लूटने में लगे हैं। जिसकी वह भारत सरकार से जांच की मांग करते हैं। -बृजभूषण शरण सिंह, सांसद/अध्यक्ष जिला निगरानी समिति, आरईसी