गोंडा। बोलने, लिखने या पढ़ने में दिक्कत वाले डिस्लेक्सिया से पीड़ित छात्रों के लिए परिषदीय विद्यालयों में विशेष पाठ योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन दिव्यांगता वाले छात्रों को मुख्य भूमिका में लाने के लिए अतिरिक्त समय देकर विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी। 31 अक्तूबर तक डिस्लेक्सिया माह के तहत जागरूकता के विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे।
बीएसए अतुल तिवारी ने बताया कि महानिदेशक स्कूली शिक्षा मोनिका रानी के निर्देश पर जिले के सभी विद्यालयों में डिस्लेक्सिया के लक्षण वाले छात्र-छात्राओं की पहचान की जाएगी। विशेष अभियान चलाकर विद्यालय स्तर पर जागरूकता रैली, अभिभावक व अध्यापक गोष्ठी, संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को लिखने व पढ़ने में वर्तनी संबंधी कठिनाई आती है। वह स्माॅल डी व बी में अंतर नहीं कर पाते, यू व एन को समझने में दिक्कत आती है। इन छात्र-छात्राओं को अलग से समय दिया जाएगा। बच्चों को आत्मविश्वासी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
यह है डिस्लेक्सिया
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नुपुर पॉल ने बताया कि डिस्लेक्सिया पीड़ित बच्चों में पढ़ने में दिक्कत, लिखने और वर्तनी की समस्या होती है। बच्चे सीधे अक्षर को उल्टा लिखते हैं। ऐसे बच्चों को बोलने, भाषा, पढ़ने, स्पेलिंग, गणित, शब्द या अंक की सही तरह से पहचान करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, डिस्लेक्सिया कोई बीमारी नहीं है, बेहतर ढंग से समझाने पर बच्चे चीजों को समझने लगते हैं।