गोंडा। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों पर शासन की निगरानी सख्त होती जा रही है। ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था के साथ ही अब शिक्षकों की वार्षिक गोपनीय आख्या (सीआर) में अंकों की व्यवस्था की गई है।
गोपनीय आख्या दर्ज करने के लिए कई तरह की व्यवस्था की गई है। जिले के 10 हजार शिक्षकों को अपनी आख्या दर्ज कराने के लिए 15 अप्रैल तक मानव संपदा पर स्वमूल्यांकन करके फीड करना होगा।
इसके बाद बीईओ परीक्षण करेंगे और ऑनलाइन ही बीएसए अंतिम रूप से सबमिट कर देंगे। सीरआर के आधार पर ही शिक्षकों की तरक्की हो सकेगी और वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। अब शिक्षकों में अंक जुटाने की होड़ है और साथ ही आक्रोश ही है।
सरकारी प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की वार्षिक गोपनीय आख्या इस वर्ष ऑनलाइन लिखी जानी है। मानव संपदा पोर्टल पर 15 अप्रैल तक प्रधानाध्यापक अध्यापक स्वमूल्यांकन करेंगे। खंड शिक्षा अधिकारी इसका मूल्यांकन 15 मई तक करके दाखिल करेंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारी वार्षिक आख्या को 31 मई तक अंतिम रूप से सबमिट करेंगे।
पहली बार बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की वार्षिक आख्या (सीआर) कॉर्पोरेट की तर्ज तैयार होने जा रही है। शिक्षक खुद अपना मूल्यांकन करेंगे और इसके बार दो स्तर पर उनके उच्चाधिकारी उस पर अंक देंगे। इसके लिए मानक पिछले वर्ष ही तय कर दिए गए थे।
जिले में 16 ब्लाकों और एक नगर क्षेत्र में 2670 प्राइमरी, जूनियर व कंपोजिट स्कूल संचालित हैं। जिसमें 10 हजार के करीब शिक्षक कार्यरत हैं। इन सभी शिक्षकों की पूरी डिटेल अब ऑनलाइन हो चुकी है, यहां तक ई सर्विस बुक भी तैयार हो चुकी है।
अब वर्ष 2020-21 का शैक्षिक सत्र मार्च 2021 में पूरा हो रहा है। इस बार ही गोपनीय आख्या ऑनलाइन दर्ज किए जाने से शिक्षकों में बेचैनी है। उनका आरोप है कि ऐसी व्यवस्था से शिक्षकों का उत्पीड़न बढ़ेगा। फिलहाल विभाग ने व्यवस्था लागू करते हुए मानक तय कर दिए हैं और 30 मई तक कार्रवाई पूरी हो जाएगी।
कोरोना प्रभाव के कारण स्कूल नहीं खुले थे, ऐसे में सीआर लिखने में छूट भी दी गई है। इस बार शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति को नहीं जोड़ा गया है। आने वाले शैक्षिक सत्र में इस पर भी अंक तय किए जाएंगे। स्कूलों में टैबलेट अभी तक नहीं पहुंचे हैं। इसलिए अध्यापकों की उपस्थिति का बिंदु भी लागू नहीं होगा।
मानकों में स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प, दीक्षा पोर्टल का उपयोग, लर्निंग आउटकम की अंतिम परीक्षा में अध्यापक द्वारा पढ़ाए गए विषय का ग्रेड, एसएमसी की बैठक, छात्रों द्वारा पुस्तकालय का प्रयोग जैसे मानकों पर शिक्षकों को कसा जाएगा। प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को भी अब पास होने के लिए नंबर जुटाने होंगे। इन्हीं नंबरों के आधार पर उनका मूल्यांकन होगा।
आगे चलकर इसी से उन्हें इंक्रीमेंट और तरक्की भी मिलेगी। इसके लिए शिक्षकों को दिए जाने वाले नंबर के पैरामीटर तय कर दिए गए हैं। समय पर विद्यालय न आने, बच्चों को पढ़ाने में रुचि न लेने तथा डिजिटल प्लेटफार्म पर न आने वाले प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को आने वाले दिनों में बड़ी दिक्कतें होने वाली हैं। उन्हें न सिर्फ नियमित स्कूल आना जाना पड़ेगा, बल्कि बच्चों को पढ़ाना भी पड़ेगा।