जनवरी में पड़ने वाली ठंड का अहसास एक माह पहले ही होने लगा है। बीते पांच दिनों से अचानक बढ़ी ठंड से लोग बेहाल हैं। अचानक तापमान गिरने से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन की ओर से न तो अभी तक अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है और न ही गरीबों को कंबल वितरण का इंतजाम। ऐसे में अभी करीब 15 दिन लोगों को और असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। सुबह-शाम व रात में कोहरा पड़ने के साथ ही बढ़ी गलन से लोग ठिठुर रहे हैं।
मंगलवार को दिन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहा। ठंड में प्रशासन की ओर से कंबल वितरण का कार्यक्रम आ गया है, पर जितने कंबल वितरण की सूचना है, उससे गरीबों की ठंड दूर नहीं हो पाएगी। कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए गरीबों को जिला प्रशासन की ओर से कंबल का वितरण किया जाएगा।
जिला प्रशासन को तहसील वार करीब 900-900 कंबल मिले हैं। सदर तहसील को 900 कंबल वितरण के लिए मिले हैं। इस बाबत तहसीलदार सदर राम नारायन वर्मा ने बताया कि 10 दिसंबर से भ्रमण कर गरीबों में कंबल का वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गरीबों में कंबल वितरण के लिए कानूनगो व लेखपालों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
वैसे तो जिले में सात विधायक व दो लोकसभा सदस्य हैं। लेकिन किसी ने रैन बसेरा नहीं बनवाया। शासन की ओर से यह व्यवस्था है कि एमएलए व एमपी भी निधि से रैन बसेरा का निर्माण करवा सकते हैं और उसमें व्यवस्था की जा सकती है। यहां जिला व महिला अस्पताल में तीन रैन बसेरों का निर्माण है, लेकिन इसमें न बेड पड़े हैं न कंबल हैं और न ही रहने के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था। तीमारदारी करने आने वाले परिवारीजनों को इसमें अपना कंबल लाकर रात गुजारनी पड़ती है।
नगर में नोटबंदी के चलते ब्लोअर व गीजर की डिमांड बहुत कम है। हां, गरीबों के लिए कोयला सहूलियत देने के लिए लोग उसे खरीद कर अपने घरों में ले जा रहे हैं। हालांकि कोयले की कीमत 25-30 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं जलौनी लकड़ी भी 10 रुपये प्रति किलोग्राम से बिकने लगी है।