अब सभी ग्राम पंचायतों को क्षेत्र में कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री पर खर्च किए गए शासकीय धन से टीडीएस के रूप में टैक्स जमा करना होगा। इस बाबत प्रदेश के वाणिज्य कर आयुक्त मुकेश कुमार मेश्राम ने प्रदेश के सभी जोनल एडिशनल कमिश्नर व जॉइंट कमिश्नर कार्यपालकों को गाइड लाइन जारी कर दी है। वाणिज्य कर विभाग अब टैक्स वसूली करने के लिए ग्राम पंचायतों पर शिकंजा कसने जा रहा है।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों को टैक्स डिडेक्शन नंबर के लिए फॉर्म-29 में ऑनलाइन ब्यौरा लेकर उसी दिन उन्हें टीडीएन का फॉर्म-30 निर्गत कर दिया जाएगा।
ग्राम पंचायतों से टैक्स जमा कराने की प्रभावी व्यवस्था बनाने के लिए वाणिज्य कर विभाग के अफसर जिलाधिकारी के साथ जल्द बैठक कर रणनीत को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा करेंगे।
वाणिज्य कर विभाग ग्राम पंचायतों को टैक्स देने के लिए विधिक बाध्यता व अर्थदंड की कार्रवाई से अवगत कराएगा। ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त व तेरहवें वित्त से मिलने वाली बड़ी रकम से विकास कार्य कराने के लिए निर्माण सामग्री आदि की खरीद करनी होती है।
इस धन से पंचायतों को चार फीसदी टीडीएस की कटौती कर वाणिज्य कर विभाग में जमा कराना है। अब ग्राम पंचायतें कुल खर्च होने वाले शासकीय धन का चार प्रतिशत हजम नहीं कर पाएंगी।
वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों ने इस कार्रवाई के लिए चर्चा कर जिला प्रशासन के साथ बैठक करने की तैयारी की है।
अब सभी ग्राम पंचायतों को वाणिज्य कर विभाग से टैक्स डिडेक्शन नंबर लेना होगा। इसके लिए वाणिज्य कर विभाग में निर्धारित प्रारूप पर टीडीएन के लिए आवेदन करना होगा।
वाणिज्य कर विभाग ग्राम पंचायतों को एक टीडीएन नंबर अलाट कर उनका पंजीयन कर लेगा। इस पर ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री पर खर्च किये जा रहे धन का चार प्रतिशत टैक्स देना होगा। प्रत्येक माह, तिमाही व छमाही सामग्री खरीद का ब्यौरा वाणिज्य विभाग को देना होगा।
असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों
की ओर से गांव में विकास कार्य कराने के बाबत शासकीय धन से की जाने वाली
खरीद के सापेक्ष टैक्स डिडेक्शन जमा किये जाने का प्रावधान है। अभी तक
ग्राम पंचायतों ने टैक्स डिडेक्शन नंबर नहीं लिया है।
इस बाबत
उत्तर प्रदेश वाणिज्य कर कमिश्नर ने जिले के जॉइंट कमिश्नर कार्यपालक को
पत्र भेजकर डीएम के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार कराने को कहा है। जिस पर
जल्द ही जिला प्रशासन के साथ बैठक कर ग्राम पंचायतों से टीडीएस जमा कराने
की व्यवस्था को अमली जामा पहनाया जाएगा। सहयोग न करने वाली ग्राम पंचायतों
को विधिक बाध्यता को लेकर जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
गांव के विकास कार्य में खरीदी जाने वाली सामग्री
* खड़ंजा मार्ग व नाली निर्माण के लिए ईंट ।
* नाली निर्माण के लिए मोरंग, बालू व सीमेंट ।
* सीसी रोड के लिए मोरंग, बालू, सीमेंट व गिट्टी।
* मनरेगा कार्य के लिए तसला, फावड़ा, बच्चों के खिलौना, झूला आदि।
* इंटरलॉकिंग रोड के लिए सीमेंटड ईंट ।
* पानी टंकी निर्माण के लिए सरिया, सीमेंट, बालू, मोरंग, गिट्टी।
* सोलर लाइट सिस्टम की खरीद।