फैजाबाद, बाराबंकी, बलरामपुर सहित आसपास के जिलों के करीब एक लाख श्रद्धालु 23 जनवरी से पसका सूकरखेत में शुरू होने वाले तीन दिवसीय मेले में जुटेंगे। घाघरा-सरयू के संगम तट त्रिमुहानी घाट पर 24 जनवरी को मुख्य स्नान होगा। गोस्वामी तुलसीदास के गुरु भूमि पर राष्ट्रीय रामायण मेला, कवि सम्मलेन, परिचर्चा समेत विभिन्न कार्यक्रम होंगे, जिसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं।
23 जनवरी की शाम को मुख्य अतिथि डीएम अजय कुमार उपाध्याय मेले का उद्घाटन करेंगे। इसी दिन एसपी प्रदीप कुमार यादव दीप प्रज्ज्वलन कर स्मारिका का विमोचन भी करेंगे।
जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर स्थित पसका सूकरखेत में हर साल पौष पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है। पौष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर पूरे एक माह पौष पूर्णिमा तक कल्पवास चलता है।
मुख्य स्नान के बाद इसका समापन होता है। पूस का महीना लगते ही श्रद्धालु त्रिमुहानी घाट पर कुटिया बनाकर कर एक माह तक कल्पवास करते हैं।
तीन दिवसीय मेले के दौरान आसपास के क्षेत्रों एवं दूसरे जनपदों से आए कलाकार जादू, सर्कस, नाटक आदि प्रस्तुत करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर यहां लोग भगवत भजन, अखंड रामायण पाठ, श्रीमद् भगवत, भंडारा सहित अन्य अनुष्ठान करते हैं।
पसका सूकरखेत राजापुर में रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म हुआ था। यहां तुलसीदास जी के गुरु नरहरि दास जी का आश्रम भी है। रामचरित मानस के बालकांड में इस स्थान का उल्लेख तुलसी जी ने किया है।
इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने वाराह का रूप धारण कर हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए इस स्थल को सूकरखेत नाम से भी जाना जाता है।
यहां एक मंदिर में भगवान सूकर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। भगवान वाराह की मूर्ति आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी। करीब 31 वर्ष पूर्व 1985 में भगवान वाराह की मूर्ति चोरी हो गई, जिसे बाद में पुलिस ने खंडित अवस्था में बरामद किया। यह मूर्ति आज भी मालखाने में रखी हुई है।
वाराह मंदिर में मूर्ति न होने से श्रद्धालु भगवान वाराह के दर्शन से वंचित रह जाते थे। संसद बृजभूषण शरण सिंह ने शाहपुर स्टेट के विंदेश्वरी प्रसाद सिंह लाल साहब, पसका कोट के अशोक कुमार सिंह, बच्चन सिंह व राजाबाबू सिंह की सहमति पर पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और बीते 28 दिसंबर को भगवान वाराह की मूर्ति मंदिर में स्थापित कराई।
पसका सूकरखेत में सरयू व घाघरा दोनों नदियां मिलती हैं। इस स्थल को संगम कहते हैं। सरयू-घाघरा के संगम स्थल त्रिमुहानी घाट पर श्रद्धालु स्नान करते हैं, परंतु संगम स्थल पर बांध बनने से अब यहां संगम नहीं हो पा रहा है। अब सात किमी दूर चंदापुर किटौली में घाघरा व सरयू नदियों का संगम होता है।
सनातन धर्म परिषद एवं सूकरखेत विकास समिति की तरफ से पसका में 33वां राष्ट्रीय रामायण मेला एवं सूकरखेत महोत्सव का आयोजन होगा।
समिति के अध्यक्ष डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने बताया कि 23 एवं 24 जनवरी को रामचरित मानस पाठ, सीताराम नाम संकीर्तन भजन का आयोजन होगा। पसका महोत्सव के मंत्री विजय कुमार मिश्र ने बताया कि पसका विकास मंच एवं पसका तीर्थ मेला समिति के तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रम होंगे।
पसका मेले में होने वाले कार्यक्रम
- 23 और 24 जनवरी को रामचरित मानस पाठ, सीताराम नाम संकीर्तन।
- 23 जनवरी को शाम 6 से 7 बजे धर्म का सामाजिक सरोकार विषय पर गोष्ठी।
- 23 जनवरी को अखिल भारतीय कवि सम्मलेन एवं मुशायरे का आयोजन।
-24 जनवरी को दोपहर 12 से दो बजे तक पर्यावरण संरक्षण में जन सहभागिता विषय पर गोष्ठी।
- 23 से 25 जनवरी शाम 4 से 6 बजे अंशुमान जी महाराज प्रणवपुरी जी वृंदावन का राम कथा पर प्रवचन।
- 24 जनवरी की शाम 5 से 8 बजे तक लोक गीत नाटक एवं जादू का कार्यक्रम।