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Gonda News: शराब निकासी में फंसे सहायक आबकारी आयुक्त पर कार्रवाई शासन में लंबित 1

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गोंडा। बलरामपुर के थोक व्यापारी अभिषेक गुप्ता के गोदाम में जुलाई 2021 में अवैध रूप से मिली नानपारा आसवनी की बनी 76 पेटी देसी शराब मामले में कार्रवाई नहीं हुई है। देवीपाटन मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने जांच में आसवनी के सहायक आबकारी आयुक्त राम सजीवन (द्वितीय) को दोषी पाया और कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी। अभी मामले में कार्रवाई शासन स्तर पर लंबित है।
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कानपुर के पनकी में अवैध शराब का जखीरा मिलने के बाद शासन के निर्देश पर 30 जुलाई 2021 की रात बलरामपुर में छापेमारी हुई। जिसमें जिला आबकारी अधिकारी राजेश त्रिपाठी ने आबकारी निरीक्षक अजीत सिंह यादव, तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक व कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक के साथ बलरामपुर जिले में देसी शराब के थोक लाइसेंसी अभिषेक कुमार गुप्ता के लाइसेंसी गोदाम सीएल-टू परिसर में तलाशी ली। जहां 76 पेटियां बानी ब्रांड की देशी शराब रखी मिली।
जिस पर चस्पा बार कोड एचक्यूआर कोड को स्कैन ट्रेस करने पर अन्य विवरण के साथ श्रावस्ती किसान सहकारी चीनी मिल नानपारा बहराइच अंकित पाया गया। छानबीन के दौरान सीएल-टू के नाम सहित अन्य विवरण के सामने एनए लिखा मिला और लेखा के अनुसार 76 पेटियां स्टाक के अतिरिक्त मिलीं। टीम ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई। जांच में यह बात सामने आई कि बिना किसी परिवहन पास व शुल्क जमा किए ही गोदाम को भेजा गया। बिना शुल्क जमा किए मदिरा की निकासी नहीं की जा सकती। इसके लिए वहां तैनात सहायक आबकारी आयुक्त राम सजीवन (द्वितीय) की जिम्मेदारी थी। मंडल के उप आबकारी आयुक्त ने भी दो अगस्त को भेजी रिपोर्ट में उन्हें दोषी माना। (संवाद)
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टास्क फोर्स की जांच पर हुए थे निलंबित
मंडल के उप आबकारी आयुक्त की रिपोर्ट पर टास्क फोर्स लखनऊ ने जांच किया और कार्रवाई की संस्तुति की। जिस पर विभाग ने उन्हें निलंबित किया और जांच आयुक्त देवीपाटन मंडल को सौंपी। विभागीय सूत्र बताते हैं कि आयुक्त एमपी अग्रवाल ने साल-2022 में ही आरोपी अधिकारी का जवाब, प्रस्तुतकर्ता अधिकारी उप आबकारी आयुक्त का पत्र और क्षेत्रीय आबकारी प्रयोगशाला लखनऊ के सहायक अल्कोहल टेक्नोलॉजिस्ट अनिल कुमार वर्मा के बयान, जिरह आदि अभिलेखों के साथ जांच पूरी की। अपनी आख्या शासन के अपर मुख्य सचिव आबकारी को मई-2022 में ही भेज दी है। भ्रष्टाचार व लापरवाही के मामलों में योगी सरकार की जीरो टालरेंस की नीति को देखते हुए माना जा रहा है कि दोषी सहायक आयुक्त राम सजीवन (द्वितीय) के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्यवाही हो सकती है।
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