फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षाविद् छोटेलाल दीक्षित के निधन से अस्त हुआ गोंडा का सूरज

विज्ञापन
गोंडा में डॉ. छोअेलाल दीक्षित। - फोटो : GONDA
विज्ञापन
गोंडा। हिंदी के विद्वान और लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. छोटेलाल दीक्षित (84) का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन से सभी स्तब्ध रह गए। लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज की स्थापना दौर से जुड़े दीक्षित ने समाज और साहित्य को नई दिशा देने में कभी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। हिंदी साहित्य को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपना हमेशा योगदान दिया तो अब तक करीब 300 बेटियों के हाथ पीले कराकर एक मिसाल बन चुके थे। सेवानिवृत्त होने के बाद वह लगातार सामाजिक कार्यों में जुड़े रहे। सोमवार को उनके निधन की सूचना ने समाज को झकझोर कर रख दिया।
विज्ञापन

उन्होंने युवाओं की भी फिक्र की और रोजगार परक प्रशिक्षण के लिए शहर के गायत्रीपुरम में श्रीमां आईटीआई की स्थापना किया। वह अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गये हैं। स्वर्गीय दीक्षित 1966 में एलबीएस कॉलेज की स्थापना और मान्यता में योगदान दिया। वे हिंदी विभागाध्यक्ष बने। 1989 में आयोग से प्रथम चयनित प्राचार्य के रूप में उन्हें केके कॉलेज इटावा के प्राचार्य का दायित्व मिला। 1991 में आयोग ने एलबीएस डिग्री कॉलेज का प्राचार्य बनाया। 1997 में सेवानिवृत्ति के बाद 2001 में श्रीमां विद्यालय स्थापित किया। 2009 में श्रीमां आईटीआई की स्थापना की, जो मंडल का प्रतिष्ठित आईटीआई है। दीक्षित ने सामाजिक कार्यों में बढ़कर हिस्सा लिया। आपातकाल का विरोध करते हुए जेल की यात्रा भी की। सेवानिवृत्ति के बाद लगभग 300 निर्धन कन्याओं का विवाह कराया। प्रतिवर्ष गरीबों को गर्म कपड़े और कंबल बांटते थे। दर्जनों छात्राओं की पढाई में निजी व्यय से मदद की।
बीते 25 अगस्त को अस्वस्थ होने पर लखनऊ गये। निजी अस्पताल में छोटी आंत का ऑपरेशन हुआ। ठीक होकर डिस्चार्ज कर दिये गये। सोमवार की सुबह अचानक सांस रुक जाने से निधन हो गया। उनके निधन पर एलबीएस डिग्री कॉलेज के शिक्षकों ने शोक जताया। उनके करीबी शिक्षक रघुनाथ पांडेय कहते हैं कि उन्होंने हमेशा समाज की चिंता की। एलबीएसए के विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र मिश्र ने कहा कि वह एक मनीषी थे, समाज को उन्होंने हमेशा नई दिशा दी। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव कहती हैं कि वह हर बेसहारा के सहारा थे। उनके निधन पर प्रगतिशील लेखक संघ के जिलाध्यक्ष सूर्य प्रसाद मिश्र, डॉ. मिथिलेश मिश्र, एलबीएस की प्राचार्य डॉ. वंदना सारस्वत, डॉ. जयशंकर तिवारी सहित तमाम मनीषियों ने पहुंच कर संवेदना व्यक्त की और साहित्य जगत में एक अपूर्णीय क्षति माना और कहा कि समाज का एक पुरोधा चला गया।
विज्ञापन

हिंदी साहित्य में याद रहेगा योगदान
पूर्व प्राचार्य डॉ. छोटेलाल दीक्षित हिंदी के विद्वान थे। उन्होंने तुलसीदास का सौंदर्य बोध, रामकृष्ण काव्येतर हिंदी सगुण भक्ति काव्य, दिनकर का रचना संसार, जायसी का शिल्प विधान, आधुनिक काव्य में सौंदर्य बोध के विविध आयाम, आधुनिक काव्य में फंतासी की प्रासंगिकता, जायसी का शिल्प विधान, भाषा भारती, सकारात्मक सोच की दिशाएं, दीप जलते रहने दो, हम अकेले नहीं हैं, चेतना के स्तर, भक्ति योग की श्रेष्ठता, महात्मा बुद्ध के विचार, बांग्ला भाषा के कवि और उनका काव्य, आपात काल के कवियों की कविताएं, आधुनिक हिंदी कहानी और फंतासी, श्रीमां के विचार आदि पुस्तकें लिखीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें