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नगर पालिका में एई न जेई कैसे परखें निर्माण कार्यों की गुणवत्ता

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फोटो-5-गोंडा का नगर पालिका परिषद। -संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। नगर पालिका परिषद में न एई हैं और न ही जेई की तैनाती है। ऐसे में विकास कार्यों में मनमानी हो रही है। कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परखने का काम उधार के अवर अभियंताओं के सहारे है। अवर अभियंताओं पर अपने मूल तैनाती वाले विभाग का ही इतना भार है कि उन्हें विभागीय कार्य से फुरसत नहीं है। इस कारण पहले वह अपने विभाग का काम निपटाते हैं, बाद में नगर पालिका के कार्यों की गुणवत्ता परखते हैं। यहां उधार के अवर अभियंता दो तीन माह में सिर्फ एक बार आते हैं। ऐसे में विकास कार्यों में मनमानी लाजमी है।
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नगर पालिका परिषद में सड़क, भवन, शौचालय के निर्माण समेत अन्य सिविल के कार्य होते हैं। इसके मेजरमेंट के लिए यहां सहायक अभियंता सिविल, अवर अभियंता सिविल के पद स्वीकृत हैं। सहायक अभियंता सिविल का पद पिछले तीन दशक से खाली चल रहा है। अवर अभियंता सिविल का पद भी पांच साल से रिक्त है। इसी तरह सहायक अभियंता जल के पद पर किसी की पिछले तीन दशक से तैनाती नहीं हुई। अवर अभियंता जल के पद एक साल पहले तैनाती थी। मगर उनका तबादला होने के बाद से यह पद भी रिक्त चल रहा है। यहीं नहीं अवर अभियंता इलेक्ट्रिकल का पद रिक्त है।
नगर पालिका प्रशासन में सिविल का काम देखने के लिए लोक निर्माण विभाग के जेई मनोज कुमार को लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त प्रभार मिला है। उनके जिम्मे अपने मूल तैनाती वाले विभाग के काम का भार इतना अधिक है कि वह दो तीन माह में सिर्फ एक बार ही नगर पालिका के विकास कार्य देख पाते हैं।
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हालांकि मत्स्य विभाग के अवर अभियंता केके सिंह को भी सिविल के कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए लगाया गया है। वह भी अपने विभागीय कार्य से फुरसत पाने के बाद ही नगर पालिका का अतिरिक्त प्रभार देखते हैं। नगर पालिका की तरफ से जो विकास कार्य कराए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजमी है। नगर पालिका के विकास कार्यों की गुणवत्ता उधार के अवर अभियंताओं के सहारे हैं। (संवाद)
अभियंताओं के स्वीकृत पद उपलब्धता
सहायक अभियंता सिविल-1 -
सहायक अभियंता जल-1 -
अवर अभियंता सिविल-1 -
अवर अभियंता जल-1 -
अवर अभियंता इलेक्ट्रिकल-1 -
अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेशलिस्ट देख रहे जेई जल व इलेक्ट्रिकल का प्रभार
नगर पालिका परिषद में एक साल से अवर अभियंता जल का पद खाली है। यहां अवर अभियंता जल के पद पर अर्चना की नियुक्ति थी। लेकिन एक साल पहले बस्ती के लिए तबादला कर दिया गया। नगर पालिका क्षेत्र की डेढ़ लाख की आबादी के लोगों को जलापूर्ति में परेशानी होने लगी। समस्या को देखते हुए पालिका अध्यक्ष उजमा राशिद ने यहां अमृत योजना के तहत तैनात अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेशलिस्ट पीयूष यादव को जेई जल का प्रभार सौंप दिया। जेई इलेक्ट्रिकल अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेशलिस्ट पीयूष यादव को बनाया गया है। शहर को पालिका की तरफ से पानी की समय से आपूर्ति कराने की जिम्मेदारी भी उधार के अवर अभियंता निभा रहे हैं।
बाबू के सहारे ट्रांसपोर्ट का काम
नगर पालिका परिषद के 47 वाहनों के संचालन के लिए तकनीकी सहायक के पद किसी की तैनाती नहीं है। वाहनों के संचालन के लिए तैनात लिपिक वेद प्रकाश को वाहन प्रभारी बनाया गया है। एक लिपिक के सहारे ट्रांसपोर्ट के संचालन का काम चल रहा है। ट्रांसपोर्ट के वाहनों में 13 हजार रुपये से अधिक के स्पेयर पार्ट्स की खरीद पर परिवहन निगम के तकनीकी सहायक से अनुमति लेने का प्रावधान है। बिना अनुमति के ही 13 हजार रुपये से अधिक के पार्ट्स खरीदे जा रहे हैं।
नगर पालिका में पिछले पांच साल से अवर अभियंता सिविल, इलेक्ट्रिकल खाली चल रहे हैं। अवर अभियंता जल का पद भी एक साल से रिक्त चल रहा है। शासन को पत्र भेजकर अवर अभियंताओं के नियुक्ति की मांग की गई है। सदर विधायक प्रतीक भूषण शरण सिंह ने शासन में प्रमुख सचिव से मिलकर अवर अभियंताओं की तैनाती न होने से विकास कार्यों के गुणवत्ता की जांच में परेशानी का हवाला देते हुए नियुक्ति की मांग की। अभी तक सभी पद रिक्त ही हैं। उजमा राशिद, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद गोंडा
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