गोंडा। बुखार व डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बाद भी सरकारी अस्पतालों में पीड़ितों को इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या का ग्राफ 73 तक पहुंच जाने के बावजूद जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी में फीवर हेल्प डेस्क तक संचालित नहीं हुई है। सीएचसी व पीएचसी में बुखार पीड़ितों से जुड़ी जरूरी पैथालॉजी जांच तक का कार्य बंद पड़ा है। ऐसे में डॉक्टरों का टोटा मरीजों की परेशानी को दो गुना बढ़ा रहा है।
अधिकांश सीएचसी व पीएचसी में डॉक्टरों की तैनाती न होने से रिक्त पड़े पदों के कारण कार्यरत फार्मासिस्ट ही मरीजों से लक्षण पूछकर दवा देकर इलाज की रस्म अदायगी निभा रहे हैं। डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सभी सरकारी अस्पतालों में फीवर हेल्प डेस्क बनाकर बुखार पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग का निर्देश दे रखा है। जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी पर संचालित होने वाली इन्हीं डेस्क के माध्यम से बुखार पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग कर जरूरी जांच करवाने के साथ चिह्नित बुखार व डेंगू पीड़ितों की दैनिक अपडेट रिपोर्ट भी जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजी जानी है।
डिप्टी सीएम के सख्त निर्देश के बावजूद जिले में कंट्रोल रूम स्तर से बुखार पीड़ितों की निगरानी का कार्य हाशिए पर है। किसी भी अस्पताल में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में कोविड काल के दौरान बनी हेल्प डेस्क भी वर्तमान में पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी है। फीवर हेल्प डेस्क न होने से बिना तापमान की जांच के ही बुुुखार पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। शनिवार को जिला अस्पताल में विशुनापुर से इलाज कराने आए परमात्मादीन ने बताया कि उसके बच्चें को चार दिनों सेे तेज बुखार आ रहा है।
पीएचसी से लेकर दवा खिलाने के बाद भी जब कोई फायदा नहीं हुआ तो उसे जिला अस्पताल लाकर दिखाया। डॉक्टर द्वारा बुखार से संबंधित जो जांच पर्चे पर लिखी गई वह अस्पताल में न हो पाने पर निजी केंद्र से महंगी फीस देकर करवानी पड़ी। लेकिन जांच रिपोर्ट तीन बजे के बाद मिल पाने के कारण अब सोमवार को फिर से अस्पताल जाकर दिखाना पड़ेगी।
कई सीएचसी-पीएचसी पर जांच कार्य बंद
संसाधनों की कमी के कारण जिले में संचालित अधिकांश सीएचसी व पीएचसी में पैथालॉजी से जुड़ी बुखार पीड़ितों की सभी तरह की जांच का कार्य बंद पड़ा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटियाथोक पर डेंगू की जांच में जरूरी सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट) जांच तक भी मरीजों को बाहर से ही कराना पड़ रही है। ऐसे में अधिकांश बुखार पीड़ित जांच कराने के बजाए घर वापस लौटकर झोलाछाप के चक्कर में फंसने को विवश हो रहे हैं। इस संबंध सीएचसी अधीक्षक डॉ. मेराज का कहना है कि बीते कुछ माह से सीबीसी काउंट जांच मशीन खराब है, इसके लिए पत्र लिखा गया। वहीं रुपईडीह सीएचसी पर जांच व दवा वितरण का कार्य भी नहीं हो पा रहा है। सीएचसी छपिया पर भी मशीनें तो हैं लेकिन जरूरी रसायन न होने के कारण जांच का कार्य नहीं हो पा रहा है।
डॉक्टरों की कमी से फार्मासिस्ट बांट रहे दवा
अधिकांश सीएचसी पर डॉक्टरों की तैनाती न होने से मरीजों का इलाज फार्मासिस्टों के सहारे चल रहा है। सीएचसी काजीदेवर की पीएचसी पूरे तिवारी में मरीजों को न तो इलाज के लिए डॉक्टर मिल पाते हैं और न ही इलाज से जुड़ी जरूरी दवा व जांच सुविधा। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को लक्षण के आधार पर मौजूद फार्मासिस्ट ही परामर्श के साथ उपलब्ध लाल पीली सफेद टिकिया देकर इलाज की रस्म अदायगी पूरी कर रहे हैं। इस संबंध में काजीदेवर के अधीक्षक डॉ. एसएन सिंह का कहना है कि सीएमओ को कई बार रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन अभी तक डाक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है।
सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर बने कोविड हेल्प डेस्क को सक्रिय कर फीवर हेल्प डेस्क बनाने का निर्देश दिया गया है। डेस्क पर बैठा कर्मचारी मरीजों का बुखार मापकर ही अस्पताल की ओपीडी में इलाज को भेजेगा। फीवर हेल्प डेस्क का संचालन शुरू न करने वाली सीएचसी व अस्पताल अधीक्षकों से जवाब मांगा गया है। डॉ रश्मि वर्मा, सीएमओ