गोंडा। 37 वर्ष के बाद रेल गोंडा रेलवे डीजल शेड को विद्युत रेलवे लोको शेड में परिवर्तित किया जा रहा है। इसको लेकर रेलवे बोर्ड ने नौ इलेक्ट्रिक लोको भेजा है। जिसे मिलाकर गोंडा लोको शेड की क्षमता बढ़ककर 67 लोको की जाएगी।
24 अप्रैल 1982 को गोंडा रेलवे डीजल शेड 22 लोको डीजल से शुरू हुआ था। शेड का शिलान्यास 5 मई 1980 को भारत सरकार के तत्कालीन रेल राज्य मंत्री शिव नारायण ने किया था और शेड का पहला सीनियर डीएमई बलराम सिंह को बनाया गया था। तभी से इस शेड में डीजल इंजनों की मरम्मत व रखरखाव का कार्य किया जाता है।
गोंडा डीजल शेड पूर्वोत्तर रेलवे का पहला डीजल शेड है। यहां से डीजल इंजनों को गोरखपुर, लखनऊ व अन्य जगह के लिए भेजा जाता है। धीरे-धीरे समय बदलने के साथ रेलवे बोर्ड ने इस शेड को डीजल इंजन से हटाकर इलेक्ट्रिक लोको शेड में करने के लिए कार्य शुरू कर दिया है। इसी के मद्देनजर कर्मचारियों को कई समूहों में विभाजित कर कानपुर व अन्य जगह इलेक्ट्रिक लोको के बारे में ट्रेनिंग भी कराई जा रही है।
विगत 8 दिसंबर को रेलवे बोर्ड ने गोंडा शेड को 9 इलेक्ट्रिक लोको भेजा है। इसे मिलाकर गोंडा शेड में 67 इलेक्ट्रिक लोको की क्षमता हो जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक इस डीजल शेड को बहुत जल्दी इलेक्ट्रिक लोको शेड में परिवर्तित कर दिया जाएगा। इसी क्रम में कर्मचारियों व अधिकारियों को डीजल से विद्युत की ट्रेनिंग दी जा रही है।
गोंडा डीजल शेड के सीनियर डीएमई ओंकार सिंह ने बताया कि गोंडा रेलवे डीजल शेड को विद्युत लोको शेड में परिवर्तित करने का कार्य किया जा रहा है। अति शीघ्र ही इस शेड से डीजल शेड खत्म करके इलेक्ट्रिक शेड हो जाएगा।