दो दिन के भीतर एल्गिन-चरसड़ी और फिर उसके किनारे बने रिंग बांध को काटने के बाद घाघरा नदी की एक धारा तहसील करनैलगंज के गांवों की ओर मुड़ गई है। जिससे शुरूआती दौर में तहसील क्षेत्र के पांच गांवों में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया है।
मंगलवार सुबह जहां नकहरा गांव के आधा दर्जन मजरे चौतरफा बाढ़ के पानी में घिर चुके थे तो वहीं नकहरा से ही सटे प्रतापपुुर, काशीपुर, घरकुंइया, गौरा मांझा, रेक्सड़िया व रायपुर जाने वाले रास्ते पर भी नदी का पानी धीरे-धीरे आना शुरू हो गया है।
हालांकि जलस्तर में आ रही गिरावट से नदी का पानी एक रफ्तार में ही आगे बढ़ रहा है। लेकिन आशंका यह भी है कि अगर जलस्तर बढ़ता है तो इसका पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ना शुरू हो जाएगा। जिससे एक के बाद एक गांव इससे प्रभावित होने शुरू हो जाएंगे।
हालांकि हर स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की अलग-अलग टीमें बाढ़ क्षेत्र में तैनात कर दी गई हैं। लेकिन बात जहां तक पीड़ितों को मिलने वाली राहत की है तो पूरा प्रशासनिक अमला सिर्फ बाढ़ चौकी पाल्हापुर में ही डटा हुआ है। जबकि नकहरा और उसके आसपास के गांवों में बाढ़ पीड़ितों का हाल लेने वाला कोई नहीं है।
मंगलवार सुबह ऐसे ही बाढ़ प्रभावित गांव नकहरा में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो वहां दूर-दूर तक सिर्फ पानी ही दिखाई दे रहा था। जबकि इस पानी में फंसे बाढ़ पीड़ितों को प्रशासनिक इमदाद और राहत देने वाला दूर-दूर तक कोई नहीं था।
सुबह 10 बजे, स्थान-पाल्हापुर प्राथमिक विद्यालय/बाढ़ चौकी
यहां बाढ़ से निपटने एनडीआरएफ व एसडीआरएफ टीम के लोगों के साथ प्रशासनिक अफसर मंत्रणा करने में लगे थे। जबकि दूसरी ओर बाढ़ पीड़ितों के लिए खाना पकाया जा रहा था। थोड़ी ही देर में एडीएम त्रिलोकी सिंह व एसडीएम अनिल मिश्र के साथ फूड इंस्पेक्टर आते हैं और बाढ़ पीड़ितों के लिए बन रहे खाने की जांच करते हैं। बताया जाता है कि बाढ़ पीड़ितों के लिए यहां पूड़ी-सब्जी की व्यवस्था की गई है, जिसका वितरण थोड़ी देर बाद बाढ़ पीड़ितों को किया जाएगा।
सुबह 11 बजे, स्थान-ग्राम पंचायत नकहरा
चचरी से नकहरा जाने वाली रोड पर जगह-जगह बाढ़ का पानी आ गया था। जबकि चचरी-नकहरा से जुड़े एकमात्र इस मार्ग को छोड़कर बाकी सभी संपर्क मार्ग पानी में डूबे हुए थे। जिससे लोगों को नाव के सहारे ही अपने गंतव्य को जाना-आना पड़ रहा था। लेकिन गांव जाने वाले एक भी रास्ते पर न तो प्रशासन के अधिकारी दिखाई दे रहे थे, न ही लेखपाल व अन्य लोग।
सुबह 11.30 बजे, स्थान-ग्राम पंचायत नकहरा का मजरा तीरथरामपुरवा
चचरी रोड पर पड़ने वाला तीरथरामपुरवा गांव में पानी भरा हुआ था। यहां से सैकड़ों लोग नाव पर अपना-अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहे थे। लेकिन यहां भी इन बाढ़ पीड़ितों को प्रशासनिक इमदाद और राहत देने वाला कोई नहीं था। बाढ़ पीड़ितों से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अभी तक उनके गांव में कोई झांकने नहीं आया है।
दोपहर 12 बजे, स्थान-ग्राम पंचायत नकहरा का मजरा काशीरामपुरवा
यहां गांव के तमाम लोग अपने घरों में रखा सामान गांव से बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने में लगे थे। पूछने पर गांव वालों ने बताया कि दोपहर होने को है। लेकिन अभी तक न तो गांव में लेखपाल झांकने आए हैं न ही प्रशासन की ओर से उनके खाने-पीने की ही कोई व्यवस्था की गई है। घर के बूढ़े-बच्चे खाने के लिए मारे-मारे फिर रह रहे हैं। बस कहने के लिए कुछ नावें जरूर लगा दी गई हैं। लेकिन नावें भी ऐसी कि जरा सी चूक हो तो सामान सहित बाढ़ के पानी में गिर जाएं।