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घाघरा उफानाई, आठ गांव बाढ़ के पानी से घिरे

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करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा खतरे के निशान 31 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। गुरुवार को 2 लाख 3 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज रहा। घाघरा में आए उफान के कारण गोंडा व बाराबंकी के 8 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। यहां तक घाघरा का पानी नए बांध तक पहुंचने लगा है। जिससे लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
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गुरुवार की भोर होते घाघरा का पानी तेजी से बढ़ने लगा। बुधवार को ढाई लाख क्यूसक से अधिक पानी छोड़े जाने से आशंका व्यक्त की जा रही थी वह सही साबित हुई। गुरुवार को घाघरा में आए उफान के कारण काशीपुर व मांझा रायपुर के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी प्रवाहित होने लगा। लोग अपना जरूरी सामान व मवेशियों के साथ बांध पर पलायन करने लगे। अब तक आठ ग्राम पंचायतों की करीब छह हजार आबादी अपना घर बार छोड़ सुरक्षित ठिकानों पर पहुंच गई है। वहीं तमाम ग्रामीण अभी भी ठिकाने की तलाश में भटक रहे हैं। काशीपुर निवासी कमलेश, अमरेश, मनोज, मुन्नन, कनशू, सुरेंद्र, भोला, संतोषी, रामदीन आदि के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। जिससे नाव के सहारे लोग अपने जरूरी सामान को निकाल कर लोग बांध पर शरण ले रहे हैं।
मल्लाहन पुरवा के देवशरण के घर में पानी पूरी तरह से चला गया है। घर की महिलाओं ने बताया कि यह तो हर साल की कहानी बन चुकी है। अब तो हम लोगों का गांव निर्माणाधीन बांध के अंदर आ चुका है। डूबना तो तय है मगर अभी कुछ कसर है। बाढ़ के डर से आधे परिवार के लोग पहले ही घर छोड़ कर जा चुके हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। घर गृहस्थी छोड़कर कहां चले जाएं। अपने फूस के घर की ओर इशारा करते हुए बताया कि सबको तो कॉलोनी और शौचालय मिला है। मगर बाढ़ पीड़ितों को अबतक पिछले दो साल का मुआवजा तक नहीं मिला। सीमा पर बसे मांझा रायपुर, कमियार, परसावल, नैपुरा, नकहरा, बेहटा का भी है। यहां के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है।
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लोग बांध पर शरण लिए हुए हैं। यहां संचालित प्राथमिक विद्यालय मांझा रायपुर का भवन वर्ष 2013 में ही घाघरा की भेंट चढ़ गया था। तभी से यह स्कूल बांध के निकट पेड़ों के नीचे संचालित किया जा रहा है। ग्राम नैपुरा एवं परसावल के ग्रामीणों में रामनिवास, नरेश, सुरेश कुमार, रामबहादुर, साधु शरण आदि ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री का दो दो बार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण हुआ और बाराबंकी के सरहदी बाढ़ प्रभावित गांव व गोंडा जिले के बाढ़ प्रभावित गांव में कृषि में हुए नुकसान का आकलन करवाकर किसानों को उनके नुकसान का लाभ देने का आश्वासन दिया गया था। मगर वर्ष 2017 एवं 2018 की बाढ़ में हुए नुकसान का अब तक कोई भी लाभ बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को नहीं मिला है। बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह ने बताया बांध पूरी तरह सुरक्षित है। जलस्तर बढ़ने से मैदानी इलाकों में पानी तेजी से भर रहा है। एसडीएम ज्ञान चंद गुप्ता कहते हैं कि लगातार गांवों व बंधे की निगरानी कराई जा रही है। अब तक कोई समस्या नहीं है।
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