सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने आए दिव्यांग। -संवाद
गोंडा। मेडिकल कॉलेज का नाक, कान, गला विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। यहां न तो सर्जरी के लिए दूरबीन व जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं, न ही सुनने की क्षमता जांचने वाली पीटीए (प्योर टोन ऑडियोमेट्री) या बेरा (ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडियोमेट्री) मशीन। सोमवार को सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने आए तीन मूक-बधिरों को जांच के लिए लखनऊ भेजा गया।
सीएमओ कार्यालय में सोमवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने वालों का तांता लगा रहा। उमस भरी गर्मी में अपनी बारी का घंटों तक इंतजार करने के बाद भी कई लोगों का दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बन सका। पूरे ललक निवासी मूक-बधिर रमेश कुमार को निराशा हाथ लगी। जिले के मेडिकल कॉलेज में कान की जांच न होने से दिव्यांग रमेश को लखनऊ भेजा गया। इसी प्रकार पेड़राही निवासी शिवांश सिंह को चंडीगढ़ से जांच कराने के बाद दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किया गया। सोमवार को तीन मूक बधिर मरीजों को जांच कराने के लिए बाहर भेजा गया।
दूरबीन न होने से ठप है सर्जरी
मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला विभाग में पांच साल से कान की सर्जरी प्रभावित है। ईएनटी सर्जन डॉ. परमानंद राय ने बताया कि दूरबीन न होने के कारण कान की सर्जरी नहीं हो रही है। नाक का ऑपरेशन कर दिया जाता है। कभी-कभार कुछ डॉक्टर अपने घर से दूरबीन लाकर सर्जरी भी कर देते हैं। दूरबीन मिलने के बाद ही नियमित ऑपरेशन हो सकेंगे।
जल्द ही दूर होगी संसाधनों की कमी
मेडिकल कॉलेज में संसाधनों की कमी दूर करने की कवायद चल रही है। ईएनटी विभाग में भी जल्द ही जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। जिससे जांच व ऑपरेशन में आसानी हो सके।
डॉ. अनिल तिवारी, सीएमएस मेडिकल कॉलेज