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स्वास्थ्य विभाग में चार लाख रुपये का घोटाला

Sat, 16 Apr 2016 09:41 PM IST
अमर उजाला/गोंडा।
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महिला दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित किया कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग में सामग्री खरीद के नाम पर चार लाख रुपये घोटाले का मामला सामने आया है। जिस बाल्टी की कीमत ओपेन मार्केट में 85 रुपये है, वही बाल्टी स्वास्थ्य विभाग में 800 रुपये की दर से खरीदी गई।
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जबकि हार्टबीट मांपने वाले स्टेथोस्कोप से लेकर पेडल सक्सेशन यूनिट, व्हील चेयर, राइटिंग टेबल जैसी अन्य तमाम चीजों की खरीदारी में भी बाजार रेट को दरकिनार करते हुए इन सामानों की खरीदारी सामान पर अंकित रेट से कई गुना ऊंचे दामों पर की गई।

यही नहीं खरीदे गए सामानों की राशि का भुगतान करते समय विभिन्न कंपनियों की ओर से दिए गए बिल इन्वाइस की भी जांच कराना स्वास्थ्य अधिकारियों ने मुनासिब नहीं समझा और फर्मों की दी गई एक बिल इन्वाइस पर ही उसे सारा पेमेंट कर दिया। वह भी बिना टीडीएस (टैक्स डिडक्शन सर्विस) की कटौती किए। 
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बताया जाता है कि शहर की दो अरबन पीएचसी (बरियारपुरवा व आईटीआई) के संचालन के लिए निदेशालय स्तर से कुल 54 सामानों की खरीदारी के निर्देश सीएमओ को मिले थे। जिसके लिए निदेशालय से छह लाख रुपये भी दिए गए थे। लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने निजी स्वार्थ के चलते आधे से ज्यादा सामान खरीदा ही नहीं और जो खरीदा भी, वह इतने ऊंचे रेट पर कि सारा पैसा उसी में खर्च हो गया।

अरबन पीएचसी के लिए जिन सामानों की खरीदारी स्वास्थ्य विभाग ने मालवीय नगर की उपभोक्ता सहकारी भंडार लिमिटेेड से की, उसके बिल वाउचर पर न तो कहीं टिन नंबर है और न ही पिन नंबर। इसके बावजूद  फर्म को चार लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया।

जबकि नवीन गल्ला मंडी की फर्म मेसर्स एएस इंटरप्राइजेज को सवा लाख रुपये का भुगतान किया गया। वह भी यह जाने कि फर्म ने जो टिन नंबर अपने बिल इन्वाइस पर लिख रखा है वह टिन नंबर नहीं बल्कि पैन नंबर है।

इसके साथ ही एमएम इंटरप्राइडेज को दो बिलों के तौर पर 38 हजार 600 रुपये व 29 हजार 900 रुपये का भुगतान किया गया है। वह भी बिना कोई टीडीएस काटे।

वहीं जानकीनगर की मेसर्स संस्कृति इंटरप्राइजेज को दो बेबी वेईंग मशीन के तौर पर सात हजार रुपये का भुगतान किया गया। जबकि दोनों वेईंग मशीन की कीमत मशीन पर अंकित प्रिंट रेट के तहत महज 2790 रुपये होती है।

दो साल पहले ठीक ऐसा ही एक घोटाला जिला अस्पताल के स्टेशनरी मद में भी हो चुका है। जिसका खुलासा फरवरी 2014 में अमर उजाला ने रुपये 15 का इंकपेन रुपये 139 में खरीदा शीर्षक से खबर प्रकाशित करके किया था। जिसमें करीब पांच लाख रुपये की स्टेशनरी सामग्री मंहगे रेट पर खरीदी गई थी। 

अपर निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, देवीपाटन मंडल डॉ. उमाकांत वर्मा ने कहा कि अभी इस प्रकरण के संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है। लेकिन अगर कोई सामान ओपेन मार्केट से कई गुना मंहगे रेट पर खरीदा गया है, तो यह गलत है। शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच होगी और जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ हरसंभव कार्रवाई होगी।
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  इन सामानों की हुई इस रेट पर हुई खरीददारी-
सामग्री         ओपेन मार्केट रेट (रु. प्रति)        फर्म को भुगतान (रु. प्रति)
स्टेथोस्कोप            350             950 
पेडल सक्सेशन यूनिट        4500             8600 
बेबी वेईंग स्केल        1395             3500 
व्हील चेयर            7890     12500 
बीपी इंस्ट्रूमेंट्स            1950             3500 
राइटिंग टेबल            2700         6800 
बाल्टी 14 लीटर            65             800 
सीलिंग पंखा 48 इंच        825             1800 
ऑफिस चेयर            1700             4200 
प्लास्टिक चेयर            250             850 
   
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