विश्नोहरपुर। हट्ठी माता मंदिर में आयोजित देवी भागवत कथा में बुधवार को प्रवाचक नीरज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जहां आदर-सम्मान न हो, वहां नहीं जाना चाहिए। भगवान शिव के मना करने पर भी माता सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में जाना स्वीकार किया। इसका परिणाम दुखद रहा। पति का अपमान न सह पाने के कारण सती को आत्मदाह करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पति के वचनों का पालन न करने वाली स्त्री सदैव दुख पाती है। संसार में विवाहित स्त्री के लिए पति ही भगवान होता है। इस अवसर पर चंद्रमौलि तिवारी, पुरुषोत्तम पांडेय, डॉ. विनोद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
वहीं, लौवावीरपुर में आयोजित भागवत कथा में प्रवाचक मनीष चंद्र त्रिपाठी ने कंस वध और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए अवतरित भगवान ने रुक्मिणी की इच्छा के अनुरूप उनका हरण कर विवाह किया था। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा करने से अभीष्ट फलों की प्राप्ति होती है। इस मौके पर सूर्यलाल तिवारी, सत्य नारायण तिवारी, राजू सिंह, भभूती आदि मौजूद रहे।