बीते दिनों राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ ने किसानों की किस्मत पर रेत व मिट्टी पाट दी है। किसानों के गाढ़ी कमाई की 51 हजार हेक्टेअर धान व गन्ने की फसल तबाह हो गई है। आने वाले दिनों में किसान परिवारों को भोजन के लिए अनाज का संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों ने शासन-प्रशासन से तबाह हुई फसलों का शीघ्र मुआवजा दिए जाने की मांग की है। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ ने करीब 10 दिनों तक भीषण तबाही मचाई। 350 गांव टापू बन गए। घरों में पानी भर जाने से अंदर रखा अनाज आदि भीग गया।
बाढ़ की त्रासदी ने घर के बाहर खेतों में भी खूब कहर ढाया। आपदा व जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक जिले में 51 हजार हेक्टेअर धान व गन्ने आदि की फसल पानी में डूबने से तबाह हो गई है। कई दिनों तक पानी भरा होने के कारण धान की फसल सड़ गई है। गन्ने की फसल भी लोट-पोट होने से काफी प्रभावित हुई है।
दलहनी व तिलहनी फसल लगभग समाप्त ही हो गई है। किसान कृष्ण गोपाल सिंह, मेहताब खां, शिव कुमार चौधरी व इलियास खां ने बताया कि फसल चौपट होने से परिवार के समक्ष भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
-जिले में धान व गन्ने की खेती करीब दो लाख हेक्टेअर में की जाती है। 25 हजार हेक्टेअर में दलहनी फसलों की खेती भी की जाती है। जिला कृषि विभाग के मुताबिक वर्ष 2017 में जिले में धान का कुल रकबा 1 लाख 10 हजार हेक्टेअर होने का लक्ष्य तय किया गया। करीब 76 हजार हेक्टेअर में जिले के किसान गन्ने की खेती करते हैं। 25 हजार हेक्टेअर में किसान दलहनी तथा मवेशियों के लिए चारा पैदा करते हैं।