करनैलगंज/उमरीबेगमगंज/पसका (गोंडा)। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के बीच नकहरा गांव के साथ ही नवाबगंज के माझा क्षेत्र के सात गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। निचले रास्तों पर जलभराव के कारण माझावासियों का आवागमन दूभर हो गया है। अब सिर्फ नाव का ही सहारा है। खेतों में पानी भरने से पशुओं के चारे का भी संकट गहराने लगा है। लोग नाव से चारा लादकर ले जा रहे हैं। उधर, सरयू नदी खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर 106.500 मीटर पर पहुंच गई है। वहीं, 3.77 लाख क्यूसेक पानी भी डिस्चार्ज हो रहा है।
बाढ़ का पानी नदी के आसपास बसे गांवों की तरफ बढ़ रहा है। दूसरी तरफ सरयू की दो धाराएं एक तरफ बहने लगी हैं, जो एल्गिन चरसड़ी बांध के लिए खतरे का संकेत है। ग्राम बेहटा, पारा, बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली, परसावल, मांझा रायपुर, बांसगांव बाढ़ की जद में आ गए हैं।
ग्राम बहुवन मदार मांझा के सामने सरयू नदी की दो धारा कई साल से बहती रही हैं मगर इस वर्ष दोनों धाराओं के एक होकर बहने से पानी का बहाव तेज हो गया है। बहुवन मदार मांझा के सामने जहां खेतों में हरे भरे पेड़ लगे थे, वह कटकर नदी की धारा में समा गए हैं। बांध और नदी के बीच परखोपाइन, बांस-बल्ली की पायलिंग, बोरियों में पत्थर भरकर कटान रोकने के लिए हफ्तों तक काम हुआ, लेकिन जलस्तर बढ़ते ही सभी इंतजाम सरयू में समा गए। नदी की धारा अब बहुवन मदार मांझा व चंदापुर किटौली के पास बांध से टकरा रही है। पानी अधिक बढ़ने या छोड़े जाने के बाद स्थिति विकराल हो सकती है। जिसके लिए बाढ़ खंड के अधिकारी भी सशंकित हैं। बोरियों में रोड़े व बंबू क्रेट संभावित कटान वाले स्थान पर डलवाए जा रहे हैं।
ऐली परसौली के दक्षिणी माझा, तेलमहन पुरवा, बिहार पुरवा, बाबूराम पुरवा, जोखन पुरवा बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। यहां की करीब दो हजार की आबादी प्रभावित है। जबर नगर व गढ़ी की एक-एक हजार की आबादी पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गई है। ऐली परसौली में पवन कुमार का घर नदी में कट गया। वहीं, रामकुमार का घर भी कटान की जद में आ चुका है। एसडीएम तरबगंज विश्वामित्र सिंह ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में सतर्कता व निगरानी बढ़ा दी गई है। बाढ़ प्रभावित लोगों को लंच पैकेट का वितरण कराया जा रहा है।
अधिकारियों ने बढ़ाई निगरानी
करनैलगंज एसडीएम यशवंत राव ने बुधवार को ग्राम चंदापुर किटौली के दो मजरों का निरीक्षण किया। एसडीएम ने बताया कि कई गांव पानी से घिर गए हैं। अभी किसी गांव में पानी नहीं भरा है। नावों की व्यवस्था कराई जा रही है। ग्रामीणों के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उधर बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता त्रयंबक त्रिपाठी व मनोज साहू, अधिशासी अभियंता जय सिंह, सहायक अभियंता पंकज आर्य, अवर अभियंता रवि वर्मा ने बुधवार को बांध का निरीक्षण किया।
बाढ़ का जोड़:: रास्तों पर भरा पानी, मुश्किल में जिंदगानी
विश्नोहरपुर (गोंडा)। माझा क्षेत्र के सात गांवों के रास्ते बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। लोगों के आवागमन के साथ ही अन्य जरूरी काम बाधित हो गए हैं।
साकीपुर गांव के मजरे अट्ठाईसा में पूर्वी तरफ से पानी घुस गया है। रास्ते जलमग्न होने से लोग पानी से होकर ही आवागमन कर रहे हैं। पशुओं के चारे के लिए नदी पार कर लोगों को जाना पड़ रहा है। बुधवार दोपहर बलराम यादव नाव से पत्नी व बेटी के साथ हरा चारा लेकर लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि अभी सरकारी नाव नहीं मिली है। अपनी निजी नाव से ही चारा ला रहे हैं। बहाव तेज होने के नाते नाव के पलटने का खतरा है। साहब शरण ने बताया कि रास्ते जलमग्न होने से आवागमन में कठिनाई हो रही है। मजरे के जुग्गीलाल बढ़ई से अपनी जर्जर नाव सही कराते दिखे। बताया कि सरकारी नाव नहीं मिली है। पानी से होकर खेत से चारा लाने के लिए टूटी नाव बनवा रहे हैं। ढेमवा मार्ग से अट्ठाईसा को जाने वाले दक्षिणी मार्ग पर दो स्थानों से पानी तेजी से आ रहा है। विक्रम यादव, कृपा, केशराम, धीरज, जलाधी, ज्ञानचंद, राम उजागिर आदि के घर पानी से घिर गए हैं। साकीपुर में डाॅ. अनूप तिवारी ने चहलावा में जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। दत्तनगर में ढेमवा जाने वाले वैकल्पिक मार्ग पर पानी आने लगा है। दो दिन में यह मार्ग भी बंद हो जाएगा।
एडीएम आलोक कुमार ने बताया कि बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है। हरेक बिंदु पर जानकारी एकत्र की जा रही है। प्रभावित इलाकों में टीमें काम कर रही हैं। अधिकारियों से फीडबैक लिया जा रहा है।