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125 गांवों में बाढ़ का कहर

Sun, 14 Aug 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
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गांव में भरा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
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बाढ़ के पानी से घिरे गांवों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। महज बाढ़ चौकियों को ही सुविधाओं से लैस किया गया है। वहीं, लगातार बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। नालों एवं तालाबों के जरिये घाघरा का पानी नित नये गांव को अपनी चपेट में ले रहा है। पानी भरने से अब तक 20 ग्राम पंचायतों के करीब 125 मजरे बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।  
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एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के बाद करनैलगंज तहसील के लिए जैसे शामत आ गई हो। इस तहसील की ग्राम पंचायत काशीपुर, घरकुइंया, प्रतापपुर, नैनुवा जगन्नाथपुर, पसका, चरसड़ी, बाबा मांझा, पाल्हापुर, गौरासिंहनापुुर, चंदापुर किटौली, अतरसुइया मांझा, नकहरा, बहुवनमदार मांझा, दिवली, वैद्यपुर तथा गोंडा की सीमा पर बसीं बाराबंकी जिले की ग्राम पंचायत कमियार, बेहटा, परसावल, रायपुर, नैपुरा भयंकर बाढ़ की विभीषिका झेल रही हैं।

ग्राम प्रतापपुर, नकार व नकहरा से निकले तीन नालों के जरिये बाढ़ का पानी रोज नये गांवों में घुस रहा है। रविवार की शाम तक 20 ग्राम पंचायतों के करीब सवा सौ मजरे बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, ग्रामीणों को प्रशासन महज भोजन की व्यवस्था गांव में मुहैया करा पा रहा है। दवा एवं पन्नी आदि की सुविधा ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही है। भोजन के अलावा मिलने वाली सुविधाएं मात्र बाढ़ चौकियों तक सीमित रह गईं हैं।
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यदि किसी बाढ़ पीड़ित को दवा या छाजन आदि के लिए पॉलिथीन या त्रिपाल की आवश्यकता पड़ती है तो उसे नाव के सहारे या पैदल पानी में उतर कर बाढ़ की चौकियों तक आना पड़ रहा है। अधिकांश गांवों में कमर तक पानी भरा हुआ है। महज ऊंचे स्थानों पर पानी कम है। बाकी लोगों को केवल नाव का सहारा है। हालांकि प्रशासन ने सभी गांवों में दो-दो नावें लगाईं है तथा सात बाढ़ चौकियों को विशेष रूप से सक्रिय कर रखा है, जहां पर तैनात कर्मी बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन ले जाकर नाव से वितरण करते हैं।

उधर, बाढ़ प्रभारी एसडीएम अनिल कुमार मिश्र बताते हैं कि अब तक करनैलगंज तहसील की करीब 15 ग्राम पंचायतों के 52 मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनकी सूची प्रशासन के पास है। वहां बाढ़ पीड़ितों के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। बाकी पांच गांव बाराबंकी के हैं। उनकी कोई जानकारी नहीं है।

उधर, बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री वितरण में लापरवाही को देखते हुए पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह के परिवारीजन गांवों में कूद पड़े हैं। अपने स्तर से वह ग्रामीणों को राहत सामग्री का वितरण करा रहे हैं। रविवार को क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह के भाई कामेश प्रताप सिंह ने बाढ़ से प्रभावित गांवों में लोगों को भोजन का वितरण किया। 
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