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डीजल के बढ़ते दाम से टूट रही पांच लाख किसानों की कमर

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गोंडा। पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ रहे दाम लोगों की परेशानियां भी बढ़ा रहे हैं। इसका खामियाजा हर वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। सात माह में डीजल व पेट्रोल की कीमतों में करीब 13 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। जिले में 90 फीसदी खेतों की सिंचाई डीजल पंपिंग सेटों से की जाती है। करीब पांच लाख ऐसे किसान हैं जो महंगा डीजल खरीदकर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। मई 2020 में डीजल की कीमत 63 रुपये प्रति लीटर थी जो अब 75 रुपये के करीब पहुंच गई है। इससे किसान कराह रहे हैं और उनका दर्द तब और बढ़ जाता है जब उन्हें डीजल फुटकर विक्रेताओं से लेना पड़ता है।
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जिले में किसानों की संख्या करीब छह लाख के करीब है। 90 फीसदी किसानों को फसल की सिंचाई के लिए डीजल पंपिंग सेट का सहारा है। पूरे जिले में धान, गेहूं, मक्का, अरहर, चना, उड़द, गन्ना सहित अन्य फसलें लगाई जाती हैं। गोंडा जिले की भूमि दोमट, बलुई व मटेरा है। जिले में सिंचन क्षमता में 90 प्रतिशत बोरिंग व डीजल पंपसेट है। इसके अलावा पांच प्रतिशत नहर व पांच प्रतिशत सोलर व बिजली के पंप से सिंचाई की जाती है। खरीफ, रवी व जायद की फसलों को बचाने के लिए अधिक सिंचाई करनी पड़ती है।
गेहूं की फसल की सिंचाई कम से कम तीन बार तथा अधिकतम चार बार करनी होती है। एक आंकड़े पर गौर करें तो एक हेक्टेयर फसल की सिंचाई के लिए किसानों को एक बार में करीब 20 लीटर डीजल का प्रयोग करना पड़ता है। इस प्रकार तीन बार सिंचाई में किसानों को करीब 60 लीटर डीजल लगाना होता है। इसके पहले खेत की सिंचाई कर पलेवा करने में और अधिक डीजल लगाना होता है। ऐसे में वाहनों में डीजल व पेट्रोल की खपत के अतिरिक्त हर साल करीब चार लाख हेक्टेयर फसल की सिंचाई करने में किसानों को करीब ढाई करोड़ लीटर डीजल एक साल में खरीदना पड़ता है।
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बोले किसान, कहां जाएं, किससे कहें
गेहूं, गन्ना व धान सहित अन्य फसलों की खेती करने वाले किसान सुनील कुमार ने बताया कि सिंचाई के लिए उनके पास पंपिंग सेट है। इसके लिए आसपास के विक्रेताओं से डीजल खरीदते हैं जिससे उन्हें टंकी से पांच रुपये प्रति लीटर अधिक चुकाने पड़ते हैं। राजेश प्रकाश ने बताया कि डीजल इतना महंगा हो गया है कि सिंचाई करने के लिए भी कई बार सोचना पड़ता है। राजकुमार ने बताया कि गेहूं की सिंचाई के लिए उन्हें 100 लीटर डीजल खरीदना पड़ा। राम नरेश ने बताया कि इस महंगाई के लिए किससे कहें, कोई सुनने वाला नहीं है। मजबूरी में डीजल खरीदना ही है वह चाहे पांच सौ रुपये लीटर हो जाए। जब तक किसानों में क्षमता है फसल बचाने की जुगत करते हैं।
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