दहेज में एक लाख रुपये न मिलने पर बहू की गला दबाकर हत्या करने के आरोपी सास-ससुर समेत पांच लोगों को अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय आरपी सिंह ने दस-दस साल की सजा सुनाई है। उन्हें तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
शासकीय अधिवक्ता विनय कुमार सिंह के मुताबिक थाना वजीरगंज क्षेत्र के उल्लापुर के रहने वाले जलील अहमद ने 18 जनवरी 2012 को कोतवाली देहात में निजामुद्दीन पुत्र उम्मी उर्फ मोहम्मद उमर, हाजिरा पत्नी उम्मी उर्फ मोहम्मद उमर, मोहम्मद आरिफ पुत्र उम्मी उर्फ मोहम्मद उमर, उम्मी उर्फ मोहम्मद उमर पुत्र मंजूर निवासी खोरहसा किंगीरिहन पुरवा कोतवाली देहात, नाजो पत्नी ताज मोहम्मद उर्फ बुच्चन, ताज मोहम्मद उर्फ बुच्चन निवासी उल्लापुर थाना वजीरगंज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जिसमें कहा गया कि जलील अहमद ने अपनी बेटी शायराबानो की शादी 25 नवंबर 2011 को निजामुद्दीन के साथ की थभ्। शादी के बाद ससुराल वाले शायराबानो से दहेज में एक लाख रुपये की मांग करने लगे। इसके लिए उसे प्रताड़ित करते थे।
दहेज की मांग पूरी न होने पर 17 जनवरी 2012 को ससुराल वालों ने शायराबानो को जहर दे दिया। इसके बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। शासकीय अधिवक्ता ने अदालत पर गवाहों के बयान कराए। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय ने गवाहों के बयान को सुना व पत्रावली का अवलोकन कर आरोपी सास हाजिरा, ससुर उम्मी उर्फ मोहम्मद उमर, मोहम्मद आरिफ, नाजो, ताज मोहम्मद उर्फ बुच्चन को दहेज हत्या के आरोप में दोषसिद्ध करते हुए दस-दस साल के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है।
प्रताड़ना के आरोप में पांचों अभियुक्तों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास व दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोप में एक-एक वर्ष के सश्रम कारवास की सजा व एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना अदा न करने की दशा में 15-15 दिनों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।