गोंडा। मेडिकल कॉलेज गोंडा को पहला मृत शरीर मिल गया है। मृत शरीर मिलने से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को सीखने में सुविधा मिलेगी। कानपुर निवासी दंपती व युग दधीचि अभियान के अगुवा मनोज सेंगर व माधवी सेंगर बृहस्पतिवार की दोपहर शव लेकर गोंडा पहुंचे। प्राचार्य से मिलकर मृत शरीर व प्रपत्र सौंपा।
मनोज सेंगर ने बताया कि 22 साल पहले कानपुर से युग दधीचि देहदान अभियान प्रारंभ किया गया था। गोंडा मेडिकल कॉलेज को मकर संक्रांति दिन अध्ययन के लिए मृत शरीर कानपुर से लाकर समर्पित किया गया। 11 नवंबर को दंपती ने प्रेसवार्ता करके देहदान करने की अपील की थी।
मनोज ने बताया कि 87/8, विजय नगर कानपुर निवासी 86 वर्षीया सरोज मिश्रा ने तेरह साल पहले वर्ष 2012 में देहदान संकल्प किया था। बुधवार की दोपहर 2 बजे उनका निधन होने पर उनके भतीजे मनीष तिवारी ने मनोज सेंगर को फोन पर सूचना देकर देहदान संकल्प पूरा कराने का आग्रह किया। अभियान की महासचिव माधवी सेंगर ने देह को गोंडा मेडिकल कॉलेज को दान करने का निश्चय किया। आवश्यक अभिलेख तैयार किए। बृहस्पतिवार की दोपहर में दंपती मृत शरीर लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। एनाटॉमी विभाग से डाॅ. राजेश कुमार, विपिन कुमार ने प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटस्थाने के निर्देशन में पार्थिव देह को पुष्पांजलि अर्पित करके स्वीकार किया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बेटी है सरोज
मनोज सेंगर ने बताया कि स्व. सरोज मिश्रा के पिता स्व. हरिविलास प्रसाद तिवारी सहित पूरा परिवार ही स्वाधीनता संग्राम सेनानी रहा है। उनकी बेटी ने भी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए अपनी देह समाज हित समर्पित कर सेवा की मिसाल कायम की है। कानपुर से चलते समय पति राजकिशोर मिश्र, भाई ज्ञानेंद्र तिवारी, भतीजे आनंद तिवारी, मनीष तिवारी, डाॅ. बृज मिश्र सहित परिजनों ने पार्थिव देह की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती की। पुष्पांजलि अर्पित करते हुए गोंडा के लिए रवाना किया।
मृत शरीर से सीखेंगे विद्यार्थी
सेंगर दंपती ने मृत शरीर मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराया है। इससे मेडिकल के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ में सीखने में सुविधा मिलेगी। अभी तक विद्यार्थी सिर्फ किताबों व डिजिटल माध्यम से शरीर के अंगों के बारे में जानकारी ले रहे थे। अब भौतिक रूप से शरीर के बारे में अध्ययन कर पाएंगे।
- डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज गोंडा