गोंडा। रेलवे के तत्कालीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर (अब गोरखपुर में तैनात) समेत छह लोगों के खिलाफ सेवानिवृत्त रेल पथ निरीक्षक की पत्नी ने अदालत के आदेश पर नगर कोतवाली में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है। लखनऊ में प्लॉट दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये की ठगी का आरोप है।
गोंडा के सेवानिवृत्त रेल पथ निरीक्षक रमेश चंद्र श्रीवास्तव की पत्नी उमा देवी निवासी सोनी हरलाल ने नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें बताया कि पति की सिद्धार्थ नगर के बढ़नी रेलवे स्टेशन में तैनात सीनियर सेक्शन इंजीनियर राजाराम यादव से जान पहचान है। राजाराम का घर में आना-जाना था। नौ नवंबर 2011 को राजाराम अपने साथी व समृद्धि ग्रुप के डेवलपर शिवकुमार श्रीवास्तव, टीएस टावर अशोक मार्ग हजरतगंज लखनऊ, ग्रुप के मैनेजर संजय श्रीवास्तव, अभय सिंह व दो अन्य लोगों के साथ उनके घर आए। सभी का परिचय कराते हुए बताया कि समृद्धि ग्रुप रियल एस्टेट की ओर से लखनऊ प्लॉटिंग की गई है, जिसे तीनों लोगों ने मिलकर खरीदा है। राजाराम पति के जानने वाले थे, इसलिए उनकी बात भरोसा करके दो प्लॉट बुक करा लिए।
नौ नवंबर 2011 24 हजार रुपये व 12 नवंबर 2011 को 80 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद जुलाई 2013 में दोनों प्लॉट के बकाया 8.96 लाख रुपये भी दे दिए। अक्तूबर 2014 में राजाराम और शिवकुमार ने रजिस्ट्री कराने के लिए 50 हजार रुपये ले लिए। जब रजिस्ट्री नहीं हुई तो जानकारी करने पर पता चला कि आरोपी परिचित लोगों को प्लॉट दिलाने का झांसा देकर ठगी करते हैं। रकम का तगादा करने पर 19 अप्रैल 2021 को आरोपी दो अज्ञात लोगों के साथ घर आए और पति को मरवा देने की धमकी देकर चले गए। नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विवेचक सत्य प्रकाश सिंह ने जांच शुरू कर दी है।