गोंडा। जिले में विद्युत व्यवस्था की बदहाल स्थिति जानलेवा स्तर तक खतरनाक साबित हो रही है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ढीले, झूलते व लटकते जर्जर एचटी लाइन के तारों और एक तरफ झुके खंभों के कारण हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायत के बाद बी विभागीय स्तर पर इस परेशानी को दूर कराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही। विभागीय जिम्मेदारों की इस लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रही है।
मुख्यालय स्थित झंझरी विद्युत उपकेंद्र के बाहर ही गलियों में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। कई स्थानों पर विद्युत पोल झुक चुके हैं, जिन्हें अस्थायी रूप से लकड़ी या किसी अन्य वस्तु के सहारे से टिकाकर रखा गया है। सिविल लाइन के रघुकुल नगर में ढीले तारों को संभालने के लिए लकड़ी के खंभों का सहारा लिया गया है, जो खतरे को और बढ़ा रहा है। ग्रामीण इलाके के परसपुर क्षेत्र के त्योरासी सुसुंडा मार्ग पर टिकुलहनपुरवा कर्बला के पास बीते लंबे समय से एक तरफ झुका पोल किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
कटरा बाजार वार्ड-10 निवासी निकेत रस्तोगी ने बताया कि पोल झुकने से तार काफी नीचे आ गए हैं, जिससे वहां से गुजरने वालों के लिए खतरा बना रहता है। नवाबगंज के कोल्ड स्टोर चौराहे के पास रहने वाले सूरज सिंह ने बताया कि तीन साल पहले क्षतिग्रस्त हुआ 33 केवी लाइन का पोल अब तक नहीं बदला गया है। धानेपुर के इंद्रानगर पेट्रोल पंप के पास रहने वाले अशोक शुक्ल का कहना है कि धानेपुर-मेहनौन जाने वाली 33 केवी लाइन का पोल भी काफी जर्जर स्थिति में है।
हादसों में जा चुकी हैं कई जान
विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। दुबहा बाजार के बेलवा गंगूबरी गांव में 16 वर्षीय दिव्यांग किशोरी की करंट लगने से मौत हो गई थी। परिजनों के अनुसार खेत के ऊपर से गुजर रही लाइन का तार पेड़ से सटा हुआ था, जिसकी चपेट में आने से हादसा हुआ। आरोप है कि घटना के बाद भी समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई और न्याय के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। इस तरह कई अन्य हादसे भी शहरी व ग्रामीण इलाकों में हो चुके हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी दिव्यरंजन का कहना है कि ढीले तारों और झुके या टूटे पोलों को दुरुस्त करना पूरी तरह विभाग की जिम्मेदारी है। इसके लिए अलग से सुरक्षा मानक और निरीक्षण व्यवस्था मौजूद है, लेकिन समय पर पालन न होने से हादसे हो रहे हैं।
बदलने के साथ मरम्मत का निर्देश
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने कहा कि लोहे के खंभों में जंग लगने से उनके गिरने का खतरा रहता है। सभी संबंधित अधिकारियों को ऐसे जर्जर हो चुके खंभों को चिह्नित कर तत्काल उनकी मरम्मत करने अथवा बदलने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।